एनसीजेडसीसी: निदेशक पद को लेकर विवाद

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। एनसीजेडसीसी के निदेशक पद को लेकर दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया है।
प्रभारी निदेशक और निदेशक आए आमने-सामने
मंगलवार की सुबह डीएम की ओर से नियुक्त प्रभारी निदेशक संत कुमार केंद्र पहुंचे। उन्होंने सोमवार की रात डीएम भानुचन्द्र गोस्वामी द्वारा सील कराए गए निदेशक के कार्यालय को खुलवाया। निदेशक की टेबल की साफ-सफाई करके कार्य शुरू कर दिया। उधर केंद्र के परिसर में स्थित आवास पर निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने कहा कि संस्कृति मंत्रालय मेरी मातृ संस्था है। उसकी ओर से मुझे पदभार सौंपा गया है। मंत्रालय की ओर से जब तक आदेश निरस्त नहीं किया जाता मैं निदेशक बना रहूंगा।
प्रभारी निदेशक ने केंद्र के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक की। सभी अनुभाग के प्रभारियों से उनके कार्य और समस्याओं की जानकारी प्राप्त की। दोपहर 3 बजे केंद्र के सभी अनुभागों, शिल्प हाट, महात्मा गांधी कला वीथिका, अतिथि गृह और पुस्तकालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कुंभ से जुड़ी फाइलों, कानूनी प्रकरण, अनुदान संबधी पत्रावली के बारे में विशेष जानकारी प्राप्त की। साथ ही केंद्र के अनावश्यक खर्चों पर अंकुश लगाने का निर्देश दिया।
विदित हो कि एनसीजेडसीसी के निदेशक पद के लिए फरवरी 2020 में विज्ञापन निकाला गया था। इस पद के लिए विभिन्न प्रांतों के कलाकारों के अलावा शहर के एक दर्जन लोगों ने भी आवेदन किया था। लेकिन दस महीने तक नियुक्त प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इस बीच संस्कृति मंत्रालय की ओर से 18 दिसंबर को दो साल तक मौजूदा निदेशक का कार्यकाल बढ़ाने का आदेश आ गया। लेकिन राज्यपाल की ओर निदेशक का पद रिक्त ही चलता रहा। इस बीच मंगलवार को राजभवन से आए आदेश के मुताबिक डीएम ने तत्काल प्रभाव से पदभार ग्रहण कर लिया।
मूल रूप से देवरिया के रहने वाले प्रभारी निदेशक संत कुमार 2017 बैच के प्रोन्नत पीसीएस अधिकारी हैं। प्रयागराज से पूर्व लखनऊ में एसीएम के रूप में कार्यरत रहे। इससे पूर्व बांदा, सीतापुर, जौनपुर, अमेठी, जालौन में कार्यरत रहे। निदेशक ने बताया कि उनका साहित्य, कला एवं संस्कृति से लगाव है। थियोसोफिकल सोसायटी वाराणसी से जुड़े रहे। बचपन से तबला वादन का शौक रहा है।
उधर, निदेशक पद से हटने से बाद इंद्रजीत ग्रोवर ने एक वीडियो जारी कर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नए अध्यादेश के मुताबिक राज्यपाल केंद्र की अध्यक्ष जरूर हैं लेकिन निदेशक की नियुक्ति का अधिकार उन्हें नहीं है। पद से हटने के आदेश का राजभवन से आए तीन पत्र एक ही दिन प्राप्त हुए इसका क्या औचित्य है। यह पत्र 5, 11 और 16 जनवरी को जारी किए गए थे। उन्होंने प्रकरण को साजिश करार दिया।


