न्यायिक मजिस्ट्रेट को मॉनिटरिंग अधिकार

आपराधिक मामले की निष्पक्ष व सही विवेचना जरूरी: हाईकोर्ट
सही विवेचना करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि न्यायिक मजिस्ट्रेट को आपराधिक मामले की निष्पक्ष व सही विवेचना की मॉनिटरिंग करने का अधिकार है। इसके लिए अनुच्छेद 226 की अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करने की मांग में याचिका दाखिल करने की बजाय सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दी जा सकती है।
इसी के साथ कोर्ट ने सही ढंग से विवेचना करने का निर्देश देने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी एवं न्यायमूर्ति शमीम अहमद की खंडपीठ ने अजय कुमार पांडेय व कई अन्य की याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए दिया है। कोर्ट ने याचिकाएं खारिज करते हुए कहा है कि याची न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष सही विवेचना कराने की अर्जी दाखिल करें।
कोर्ट के सामने सवाल था कि क्या निष्पक्ष व उचित विवेचना करने का न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देश देने का अधिकार है या नहीं? और न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष गए बगैर इसके लिए सीधे हाईकोर्ट में याचिका की जा सकती है या नहीं? कोर्ट ने इन दोनों बिंदुओं पर विचार करते हुए कोर्ट ने यह फैसला दिया है। कहा कि प्रभावशाली व्यक्ति अपराध की विवेचना को प्रभावित न कर सके, इसके लिए मजिस्ट्रेट को निर्देश करने का अधिकार दिया गया है।
कोर्ट ने कहा कि विवेचनाधिकारी का प्रारंभिक दायित्व है कि वह निष्पक्ष विवेचना करे। उसे लंबा समय नहीं लगाना चाहिए क्योंकि अनुच्छेद 21 त्वरित विचारण का अधिकार देता है। यदि मजिस्ट्रेट के संज्ञान में लाया जाता है कि विवेचना सही नहीं हो रही है तो वह निर्देश कर सकता है। उसे पुनर्विवेचना का निर्देश देने का भी अधिकार है। विवेचना सही तरीके से हो, इसके लिए मजिस्ट्रेट को मॉनिटर करने की शक्ति प्रदान की गई है। यदि वैकल्पिक फोरम है तो याचिका नहीं की जानी चाहिए। हालांकि याचिका दाखिल करने पर पूर्णतया प्रतिबंध नहीं है। सामान्यतया हाईकोर्ट को विवेचना में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
विवेचना का उद्देश्य सच्चाई को न्यायालय में पेश करना है। इसलिए विवेचना विधि सम्मत, निष्पक्ष, निर्भीक व ईमानदारी से की जानी चाहिए। यदि विवेचना सही तरीके से नहीं हो रही है तो हाईकोर्ट आने की बजाय मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी देनी चाहिए।

