26 जनवरी को दिल्ली में हुई घटना से संत भी आहत, सभी ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण

सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग किसानों को दी सूझबूझ से काम की नसीहत

( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी को हुई हिंसक घटना और तिरंगे के अपमान से संत समाज भी आहत है। उसके मन में दुख के साथ ही आक्रोश भी है। संतो ने सरकार से उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की है। उन्होंने किसानों को भी सूझबूझ से काम लेने और देश विरोधी ताकतों से सावधान रहने की नसीहत दी है।
ओम वाहिगुरु ऋषि आश्रम अन्नक्षेत्र के श्रीमहंत स्वामी सत्यानन्द सरस्वती ‘सत्यम’ जी महाराज ने 26 जनवरी को दिल्ली में हुई घटना पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि तिरंगे का अपमान कर देश के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले कोई भी हों उन पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। किसी को भी देश विरोधी कार्य करने का हक नहीं है। स्वामी सत्यम जी ने कहां की किसान आंदोलन में कुछ देश विरोधी ताकतें शामिल हैं जो नहीं चाहती हैं कि सरकार और किसानों के बीच बात बने। उनका मकसद किसी भी हाल में टकराव कराना है। किसानों को इनकी पहचान कर सावधान रहने की जरूरत है। किसानों को सरकार का प्रस्ताव स्वीकार कर कानूनों पर चर्चा करनी चाहिए। लोकतंत्र में किसी भी समस्या का समाधान संवाद के जरिए ही होना चाहिए। देश के हर नागरिक को संविधान, संसद और सर्वोच्च अदालत का सम्मान करना चाहिए। जब सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों किसानों की बात सुनने और उसका समाधान करने को तैयार हैं तो किसानों को ज़िद पर नहीं अड़ना चाहिए। उनका अड़ियल रवैया उनकी मंशा पर सवाल खड़ा करता है। 26 जनवरी को जो कुछ भी हुआ वह संदेह को और भी गहरा कर देता है। किसान नेताओं को समझदारी दिखानी चाहिए अन्यथा उनकी साख खतरे में पड़ सकती है।
अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम ने दिल्ली की घटना पर अफसोस व्यक्त करते हुए कहा कि तथाकथित किसानों द्वारा दिल्ली में जिस प्रकार हिंसक उपद्रव किया गया और लाल किले पर तिरंगे का अपमान हुआ उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। शंकराचार्य जी ने कहा कि किसान कभी ऐसा कार्य नहीं कर सकता जिससे देश का अहित हो और सम्मान को ठेस पहुंचे। दिल्ली में उपद्रव करने वालों को किसान नहीं कहा जा सकता है। सरकार को उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए। स्वामी महेश आश्रम ने कहा कि किसानों को खालिस्तानी आतंकियों और राजनीतिक तत्वों से सावधान रहना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो किसानों की साख को बड़ा झटका लगेगा। किसानों को खुले दिल दिमाग से कानूनों पर चर्चा करनी चाहिए और आंदोलन को खत्म करने पर विचार करना चाहिए। संवाद से समाधान में सभी का सम्मान है।
अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्म आश्रम ने दिल्ली की घटना पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जो कुछ भी हुआ उसे करने वाला किसान हो ही नहीं सकता। उपद्रव करने वालों पर देशद्रोह की धारा लगनी चाहिए और सबको पकड़ कर जेल में डाला जाना चाहिए। किसान जिस प्रकार जिद पर अड़े हैं उससे उनकी मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्वामी शंकराश्रम ने कहा कि गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर दिल्ली को लहूलुहान और तिरंगे का अपमान करने वाले देशद्रोही हैं और जो भी उनका समर्थन कर रहे हैं वह भी देश के दुश्मन हैं। इन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।




