नरक निवारण चतुर्दशी के दिन ऐसे करें भगवान शिव की पूजा, मिलेगा मनचाहा वरदान जानिए महत्व

(अनुराग शुक्ला) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। आज माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक निवारण चतुर्दशी होती है। इस साल यह तिथि 10 फरवरी (बुधवार) को पड़ी है।
इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की पूजा का विधान है। कहते हैं कि आज के दिन शिव परिवार की पूजा करने वालों को पापों से मुक्ति मिलती है।
आयु में वृद्धि होती है और नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है।पौराणिक कथाओं के अनुसार, माघ मास की चतुर्दशी को ही शिव-पार्वती का विवाह तय हुआ था।
जबकि ठीक एक महीने बाद यानी फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। भगवान शिव और माता पार्वती की विवाह तिथि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं।
सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करें। साफ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। पूजा के दौरान भोलेनाथ को बेलपत्र और बेर जरूर अर्पित करने चाहिए। पूजा के बाद शिवजी की आरती उतारें। आरती के बाद मंत्रों का जाप करना चाहिए। शाम के समय बेर खाकर व्रत का पारण करना चाहिए।
खासकर बिहार में यह व्रत महाशिवरात्रि की तरह मनाया जाता है। कई मंदिरों में रुद्राभिषेक, श्रृंगार और जलाभिषेक किया जाता है। पंडितों के अनुसार नर्क की यातना व गलत कर्मों के प्रभाव से बचने के यह व्रत किया जाता है। श्रद्धालु स्वर्ग में अपने लिए सुख व वैभव की कामना करते हैं।


