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जीवन-मरण, व लाभ-हानि सब ईश्वर के हाथ में है- स्वामी रामतीर्थ दास

( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। स्वामी रामतीर्थ दास महाराज का शिविर माघ मेला के महावीर मार्ग पर लगा है। स्वामी रामतीर्थ दास महराज ने शनिवार को कथा में कहा कि रामचरित मानस में गुरु वशिष्ठ जी भरत जी से कहते है कि सुनहु भरत भावी प्रवल बिलखि कहेहु मुनि नाथ अर्थात भगवान राम वन गमन के पश्चात जब भारत ननिहाल से अयोध्या लौटते है। तब बिलखते हुए वशिष्ठ मुनि जी कहते है हे भरत। हानि लाभ जीवन मरण, यश और अपयश यह छह चीजे विधाता के हाथ में है। इस पर मनुष्य का कोई वश नहीं है।
उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण रामायण इन्हीं छह के आसपास चलते हुए मुखरित होती है। कहा कि बिचारिये “हानि” किसकी हुयी।
हानि अयोध्या वासियों कि हुयी जो उनको प्रभु श्रीराम का बियोग मिला। स्वामी रामतीर्थ दास महाराज ने कहा कि लाभ” किसका हुआ। लाभ वन-वासियों और केवट का हुआ। जिन्होंने प्रभु श्रीराम के दर्शन पाए और सेवा की। उन्होंने कहा कि जीवन” किसको मिला। जीवन ऋषि मुनियों को मिला। जिन्हें राक्षसों से भगवान श्रीराम ने बचाया और उन्हें अभय-दान दिया।
स्वामी रामतीर्थ दास महाराज ने कहा कि मरण” किसका हुआ।
मरण राजा दशरथ का हुआ। जिन्होंने प्रभु श्री राम जैसे पुत्र के विछोह में अपने प्राण त्याग दिए। उन्होंने कहा कि यश” किसका हुआ। यश भालू और वानरो का हुआ जिन्होंने प्रभु श्रीराम के साथ राक्षसों से युद्ध किया और विजय पाई। उन्होंने कहा कि अपयश” किसका हुआ। अपयश कैकेयी का हुआ जिन्होंने जिन्होंने प्रभु श्री राम कोरज गद्दी पर बैठने नहीं दिया और रजा दशरथ की मृत्यु का बनी। उन्होंने जोर देते हुए कहा है कि स्यष्ट है यह सभी विधाता की इच्छा पर थी और सम्पूर्ण रामायण का यही सार तत्त्व है।

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