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सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने मराठा आरक्षण को असंवैधानिक ठहराया

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मराठा समुदाय को आरक्षण की संवैधानिकता पर बड़ा फैसला सुनाया एवं मराठा समुदाय को नौकरियों और प्रवेश में आरक्षण देने के महाराष्ट्र कानून को रद्द कर दिया। याचिकाकर्ता जयश्री पाटिल की तरफ से अधिवक्ता राज सिंह राणा व पवन शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की पैरवी की। मामले की सुनवाई में चार अलग-अलग निर्णय सुनाए गए, जिसमें की एक जस्टिस श्री अशोक भूषण एवं श्री नाज़ेर ने सह- सम्मति से और तीन अलग-अलग निर्णय श्री नागेश्वर राव, हेमंत गुप्ता और रवींद्र भट ने दिए। खंडपीठ ने कहा कि इंदिरा साहनी मामले में 9-जजों की बेंच के फैसले से निर्धारित आरक्षण पर 50% सीलिंग सीमा को फिर से लाने की आवश्यकता नहीं है। सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के रूप में मराठों को 50% से अधिक सीमा सीमा में आरक्षण देने को उचित ठहराने वाली कोई असाधारण परिस्थिति नहीं थी। जस्टिस श्री अशोक भूषण द्वारा मामले पर फैसला देते हुए कहा गया कि “102 वां संविधान संशोधन, (जो कि पिछड़ा वर्ग के लिए राष्ट्रीय आयोग की शुरुआत की) ओबीसी की पहचान करने के लिए राज्यों की शक्ति को दूर नहीं करता है।

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