माहे रमज़ान की बाईसवीं की पुरी रात पढ़ी गई २३ वीं शबे क़द्र की विशेष नमाज

(अनुराग शुक्ला) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। माहे रमज़ान का हर एक दिन ढ़ेरों फज़ीलत व नेयमतों से भरा पड़ा है।माहे रमज़ान के हर दिन की अपनी फज़ीलत है।
तसबीहे फात्मा और तकबीरे मोहम्मद व आले मोहम्मद के वसीले से मांगी गई दुआ
इसी शबे क़द्र मे मुक़द्दस क़ुरआन भी नाज़िल हुआ। शबे क़द्र मे की गई इबादत के एक नहीं हज़ार गुना सवाब है।माहे रमज़ान की बाईसवीं की शब को शबे क़द्र की अहमियत ओलमाओं ने बयान की है।जिसमे सौ रकात नमाज़ और आमाल को पुरी रात इबादत मे गुज़ारी जाती है जिसका सवाब हज़ार गुना होता है।उम्मुल बनीन सोसाईटी के महासचिव सै०मो०अस्करी के अनुसार लॉकडाऊन और कोरोना गाईड लाईन की वजहा से आमाले शबे क़द्र मे मस्जिदों मे मात्र पाँच लोगों की मौजूदगी मे पुरी रात अदा की गई।घरों मे महिलाओं बुज़ुर्गों व नौजवानों ने एक रात मे सौ रकात नमाज़ (6- दिनों की एक साथ) नमाज़ पढ़ी।नमाज़ अदा करने के साथ क़ुरआन पाक की तिलावत भी जारी रही।दुआए जौशने कबीर जौशने सग़ीर,सुरा ए अन कबूर,सुरा ए रोम,सुरा ए दोखान दुआ ए तौबा के साथ एक हज़ार तसबीह के दानो पर इनज़ा अलनाह भी पढ़ा गया।नमाज़ ए ईशाँ से शुरु हुई शबे क़द्र की विशेष नमाज़ व आमाल भोर मे नमाज़ ए फजिर तक जारी रहा।आमाल मुकम्मल होने पर सजदा ए शुक्र अदा करने के साथ रिज़्क़ मे बरकत,बिमारों की शिफायाबी मुल्क मे अमनो अमान,बेऔलादों को औलाद बेरोज़गारों को नौकरी कारोबार मे हलाल कमाई व बरकत के साथ कोरोना वबा के जल्द से जल्द खात्मे की दूआ की गई।



