विवादों से घिर गए हैं फ़िल्म अभिनेता तनवीर ज़ैदी

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। अभिनेता तनवीर ज़ैदी का चर्चा में बने रहना कोई विशेष बात नहीं है । किंतु इसबार उनकी चर्चा विवादों से भरी हुई है । दरअसल उन्होंने हाल में एक पत्रिका को दिए साक्षात्कार में एक विवादास्पद बयान दिया है जिससे काफी लोग उनसे नाराज़ हैं। मैंने उनसे भेंट की ताकि इसी विषय पर बातचीत कर सकूं ।
” आपने एक पत्रिका को दिए इंटरव्यू में कहा कि आप त्योहारों के नाम पर जानवरों की कुर्बानी के विरोधी है ?” मैंने उनसे पूछ लिया । ” जी, साथ ही मैं यह भी कह रहा हूँ कि यह मेरे व्यक्तिगत विचार हैं और यदि मेरी बातों से किसी को चोट पहुंची है तो मैं उसके लिये क्षमाप्रार्थी हूँ। हालांकि मैंने यह भी कहा कि केवल बक़रीद पर ही नहीं कई अन्य धर्मो में आस्था रखने वाले भी जानवरों की बली/क़ुरबानी में आस्था रखते हैं।” तनवीर ज़ैदी ने स्पष्ट किया।
“तो क्या आप बकरीद पर बकरे की कुर्बानी नहीं करते ? मैंने जानना चाहा तो इसपर तनवीर ज़ैदी ने बताया, ” देखिये मैं अपने माता पिता के साथ रहता हूँ और मेरे घर में कुर्बानी होती थी, परन्तु मैंने आज तक कुर्बानी देखी नहीं, मैं हर बक़रीद पर अपने रूम से बाहर नहीं निकलता था, पिछली बक़रीद पर मैंने अपने पिता से विनती की कि कुर्बानी में जो ख़र्च होता है उतनी धनराशि यदि किसी मस्जिद, मदरसे या सामाजिक संस्था में दे दिए जाएं तो बेहतर होगा और मेरे माता/ पिता खुले ज़ेहन के हैं उन्होंने मेरे सुझाव को तरजीह दी और वह धनराशि मदरसे भेज दी ।”
“आप इस तरह के बयान देने से डरते नही?” मैंने बात आगे बढ़ाई ,
” मैं अपने विचार रख रहा था, जो केवल अपने लिए थे, किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाना उद्देश्य नहीं था, हालांकि मैंने तरकुलहा देवी मंदिर,गोरखपुर का भी उदहारण दिया था जहाँ मैं शूटिंग के सिलसिले में गया था, उस मन्दिर में पिछले सौ वर्षों से भैंसों की बलि दी जाती रही है और प्रसाद में मांस वितरित किया जाता है, अब कुछ वर्षों से भैंसों के स्थान पर बकरे की बलि दी जाती है।” तनवीर ज़ैदी अपनी बात जारी रखते हैं , वह आगे कहते हैं,” मैं सोचता हूँ कि ईश्वर/अल्लाह एक बेज़ुबान जानवर की बलि/क़ुरबानी से क्यों प्रसन्न होगा?” तनवीर ज़ैदी उल्टा मुझसे प्रश्न कर लेते हैं । यहां
प्रस्तुत है पाठकों के लिये तनवीर ज़ैदी के किये गए कार्यो का लेखा जोखा। बाल अभिनेता नाटक ‘अदरक के पंजे’ ( 1975 ), मुख्य अभिनेता नाटक ‘कब दूर होगा दिल का तमस’ ( 1980 ), मुख्य अभिनेता ‘चुन्नु मियाँ की चाय’ ( 1988 ), नायक वीडियो फ़िल्म ‘बगीचा’ (1985 ), नायक वीडियो/टेली फ़िल्म ‘ आई लव यू ‘(1985 ), मुख्य अभिनेता नाटक ‘बकरी'( 1986 ), मुख्य अभिनेता अंग्रेज़ी नाटक ‘मर्चेंट ऑफ वेनिस’, मुख्य अभिनेता अंग्रेज़ी नाटक ‘पपेट'( 1987 ), नायक कॉमेडी वीडियो/टेली फ़िल्म ‘मुर्गा झटके का’
( 1988 ), नायक आंचलिक फ़िल्म ‘सजनी'( 1990 ), मुख्य अभिनेता नाटक ‘नवाब मिर्ज़ा जान’ ( 1989 ), सम्पादक नीरज प्रकाशन के सिनेपाक्षिक ‘ फ़िल्मस्क्रीन’ एवं फ्रीलांस पत्रकारिता उस समय के तमाम पत्र-पत्रिकाओं के लिये ( 1990 to 2000 ), मुख्य अभिनेता हिंदी फीचर फिल्म ‘बेलगाम’ ( 2002 ), सक्रिय फ्रीलांसिंग पत्रकारिता,उपन्यास/कहानी/कविता लेखन( 2001 से 2008 ), नायक कॉमेडी सीरीज़ ‘जेल में है जिंदगी’ (2005)मुख्य सम्पादक अंग्रेज़ी सीने पाक्षिक ‘एकटी फ़िल्मस्क्रीन’ ( 2006 ), मुख्य सम्पादक हिंदी सांध्य दैनिक ‘इंडियन लीडर’ ( 2006)
नायक हिंदी/,अवधि फ़िल्म ‘काहे गए परदेस पिया ( 2009 ) एक्टी कम्प्यूटर अकादमी एवं स्कूल में बतौर निदेशक कार्यरत, एफ एम के रियलिटी शो ‘असली नम्बर वन’ बतौर जज ( 2009/ 2010 ), टी वी एवं एफ एम के रियलिटी शो ‘बिग मेमसाब’ बतौर जज ( 2010 ), टी वी रियलिटी शो ‘मेले का बिगस्टार सीज़न 1 से 7 बतौर जज एवं मेंटोर ( 2010 से 2016 ), नायक हिंदी फीचर फिल्म ‘गार्जियन’ ( 2013 )
21. नायक हिंदी फीचर फिल्म ‘इश्क़ समंदर’ ( 2016 )
22. नायक के तौर पर दो हिंदी फीचर फिल्मों ’26 जनवरी, गुड़ मॉर्निंग इंडिया’ और ’21, कमाठीपुरा, मुम्बई के प्रोडक्शन एवं शूटिग में व्यस्त ( 2017 से आजतक )


