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हाईकोर्ट बार से टैक्स वसूली में आयकर विभाग से जवाब मांगा

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आयकर विभाग द्वारा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से लगभग 40 लाख रुपये की टैक्स वसूली के मामले में केंद्र सरकार और आयकर विभाग से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। बार एसोसिएशन की ओर से इस समय सीमा पर आपत्ति की गई लेकिन कोर्ट ने कहा कि आयकर विभाग को इतना समय देना उचित है। इससे ज्यादा समय नहीं दिया जाएगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति एमएन भंडारी एवं न्यायमूर्ति अजय त्यागी की खंडपीठ ने हाई कोर्ट बार की ओर से वरिष्ठ कर एवं वित्त सलाहकार डॉ पवन जायसवाल वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह और इनकम टैक्स की ओर से गौरव महाजन को सुनकर दिया है। हाईकोर्ट बार ने आयकर विभाग द्वारा किए गए कर निर्धारण और वसूली नोटिस को चुनौती दी है। बार का कहना है कि वह सदस्यों के लाभ के लिए गठित संस्था है जो किसी प्रकार की व्यवसायिक गतिविधि में शामिल नहीं है इसलिए वह आयकर के दायरे में नहीं आती है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह ने वसूली गई रकम वापस दिलाने की मांग की। कोर्ट ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे संज्ञान में है कि कोरोना से 100 से अधिक वकीलों की मृत्यु हुई है। उनके परिवारों को आर्थिक सहायता देने का भार बार एसोसिएशन पर है। ऐसे में इस प्रकार का कर निर्धारण हुआ तो बार का खजाना अर्थदंड चुकाने में खाली हो जाएगा। वरिष्ठ कर एवं वित्त सलाहकार डॉ पवन जायसवाल ने हाई कोर्ट बार की ओर से पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि आयकर विभाग को वसूली करने से पहले यह देख लेना चाहिए कि हाईकोर्ट बार आयकर के दायरे में आता है या नहीं। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत संस्था है, जो सिर्फ अपने सदस्यों के आपसी लाभ के लिए कार्य करता है। म्यूचुअल बेनीफिट के लिए कार्य करने वाली संस्था की आय आयकर के दायरे से मुक्त होती है। एसोसिएशन की आमदनी का मुख्य स्रोत सदस्यों से मिलने वाला सदस्यता शुल्क और फोटो एफिडेविट से होने वाली आय है। इस आमदनी का कुछ हिस्सा फिक्स डिपॉजिट किया जाता है जिसके ब्याज से वकीलों को चिकित्सकीय सहायता देने का ‌कार्य किया जाता है। केंद्र सरकार और आयकर विभाग के अधिवक्ता गौरव महाजन ने विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह के समय की मांग की जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।

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