राजस्व संहिता के उपबंधों का करें पालन: हाईकोर्ट
राजस्व न्यायिक सेवा कैडर के गठन पर मांगा हलफनामा
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में स्थायी राजस्व न्यायिक सेवा कैडर के गठन पर राजस्व संहिता के उपबंधों एवं चंद्रभान केस में कोर्ट के निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया है। साथ ही प्रदेश के मुख्य सचिव से कार्य योजना के साथ हलफनामा मांगा है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने मिर्जापुर के अधिवक्ता मृगांक शेखर चतुर्वेदी की जनहित याचिका पर दिया है।
याची का कहना है कि हाईकोर्ट ने चंद्रभान केस में 2006 में ही राज्य सरकार को प्रदेश में अलग राजस्व न्यायिक सेवा कैडर गठित करने तथा अदालत भवन आदि सिविल कोर्ट जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इन अदालतों में राजस्व ,चकबंदी, जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार के मामलों की सुनवाई होगी। क्योंकि कोर्ट का कार्य न्यायिक प्रकृति का है इसलिए आंतरिक तबादलों की व्यवस्था की जाए।
कोर्ट ने कहा कि याचिका 2019 में दाखिल की गई थी। इस सम्बंध में गए कदमों की जानकारी मांगी गई थी लेकिन कुछ भी नहीं किया गया। आदेश का पालन नहीं किया गया। एडीएम न्यायिक, एसडीएम न्यायिक व तहसीलदार न्यायिक जर्जर भवन में बैठ रहे हैं। भवन की देखरेख व मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। इन अदालतों में वकील बहस करते हैं लेकिन उनके बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को राजस्व अदालतों के न्यायिक कैडर के गठन के प्रोग्राम व प्रोजेक्ट की जानकारी मांगी है।
याचिका में चकबंदी व राजस्व अदालतों में सिविल कोर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा इसके लिए कमेटी गठित कर कम्प्यूटर, लैपटॉप व किताबें मुहैया कराने की मांग की गई है। कहा गया है कि राजस्व न्यायिक सेवा कैडर गठित करने के कोर्ट के आदेश का पालन कराया जाए।



