हिन्दी-फ़ीचर-फ़िल्म “लौटा दो ज़मीर” एक काल्पनिक कथा है

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। फिल्मों में एक सच्चे लेखक की जो अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करता राकेश मनोहर।जिसकी लेखनी की दुनियां दीवानी है और उन्हीं में है एक लड़की सुलेखा जो उसके लेखन की दिवानी है उसे दिलोजान से चाहती है ।राकेश का अपना छोटा सा परिवार है–पत्नी और एक बेटी अदिति। जो उसकी प्रेरणा है, फिल्म के डायरेक्टर राकेश श्रीवास्तव ने फिल्म को एक नए अंदाज में
राकेश अपने नये उपन्यास की कहानी की तलाश में था। उसे एक रहस्यमयी दुनियां अपनी ओर खींच रही थी। वहाँ की सच्चाई को अपने उपन्यास में समेटना चाहता था और ज़िन्दगी ने उसे वो मौका दे ही दिया,और फिर एक दिन राकेश मनोहर उस रहस्यमयी दुनियां में जाता है।
वहाँ जाते ही उसने देखा कि चारों तरफ ग़रीबी-भुखमरी-बेबसी और लाचारी से भरी एक ख़ामोशी है और रहस्य भरे एक विरान हवेली की दहशत है। जहाँ आये दिन होने वाली मौतें और गंगा में बहती हुई वो लाशें। यह सब देखकर राकेश का मन द्रवित हो जाता है,,अपनी कर्तव्यनिष्ठा के प्रति दृढ़-संकल्पित राकेश एक-एक घटना को लिखता जाता है संयोग से वहाँ उसे दिलोजान से चाहने वाली सुलेखा से मुलाकात होती है।सुलेखा अपने ख्वाब को हकीक़त में पाकर खुश होती है और उसके लेखन में हरसंभव मदद करने लगती है,,,,पुरानी हवेली की ऐसी दहशत थी कि वहाँ रात में तो क्या दिन में भी कोई नहीं जाता था और अगर कभी कोई गया तो वहाँ से उसकी मृतदेह ही लौटती थी। वहाँ का रहस्य क्या था,क्या सच में वहाँ भूत-प्रेतों का बसेरा था ये सब राकेश जानना चाहता था । उस हवेली के दहशत भरे रहस्य का पर्दा हटाते-हटाते और अपने कथानक को आगे बढ़ाते-बढ़ाते एक दिन राकेश स्वयं उसमें फंस गया। जहाँ से निकलने के लिए राकेश मनोहर को अपना ज़मीर दांव पर लगाना पड़ा। उस रहस्मयी दुनिया पर लिखे उपन्यास को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया जाता है,,,,मगर उसके अंदर का ज़मीर बार-बार उसे कुरेदता रहा टीसता रहा और वो पश्चाताप की आग में झुलसकर चीखता-चिल्लाता रहा “मुझे मेरा ज़मीर लौटा दो,मुझे मेरा ज़मीर लौटा दो,”लौटा दो मेरा ज़मीर” प्यार-रोमांच और रहस्य से भरी इस कहानी में हर पल एक रहस्य बना रहता है। कहानी कि अंतिम जिज्ञासा,,,,क्या सुलेखा को उसका प्यार मिला? क्या खंडहर के राज से पर्दा उठा ?
क्या राकेश को उसका ज़मीर वापस मिला ? इन सभी सवालों के जबाव के लिये देखनी होगी फिल्म “लौटा दो ज़मीर”।


