फर्जीवाड़ा में रेलवे की ग्रुप डी परीक्षा में तीन अभ्यर्थी डिबार
( अनंत पांडेय ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ (आरआरसी) की परीक्षा में तीन आवेदकों ने फर्जीवाड़ा करके सफलता पाई थी। अभ्यर्थियों के फिजिकल, मेडिकल और प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान मामला पकड़ में आ गया। जांच में पता चला कि तीन युवकों ने अपनी जगह दूसरों को बैठाकर परीक्षा दिलाई थी। पकड़ में आने पर तीनों अभ्यर्थियों को आरआरसी ने डिबार कर दिया है। अब उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की तैयारी है। फर्जीवाड़े में पकड़े गए अभ्यर्थी प्रतापगढ़, गाजीपुर और तीसरा बिहार का रहने वाला है।
ग्रुप डी की परीक्षा 2018 में आयोजित हुई थी। रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ ने लिखित परीक्षा 2019 में कराई थी। इसी साल परिणाम घोषित हुआ। परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों का फिजिकल, मेडिकल कराया गया। प्रमाण पत्रों की जांच के अभ्यर्थियों को बुलाकर नियुक्ति पत्र दिया जाने लगा। सोमवार और मंगलवार को 71 अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की जांच आरआरसी में हुई। जांच के दौरान गाजीपुर के मनोज कुमार पुत्र राम नारायण के प्रमाण गलत पाए गए। फोटो का मिलान हुआ तो मामला पकड़ में आ गया। बायोमीट्रिक जांच में फर्जीवाड़े की बात खुल गई। अभ्यर्थी को बुलाकर जानकारी ली गई तो उसने कबूल कर लिया कि परीक्षा में कोई और बैठा था। उसने आरआरसी अफसरों को बताया कि एक लाख रुपये में किसी दूसरे ने परीक्षा बैठ पास कराने का ठेका लिया था। फर्जीवाड़ा पकड़े जाने पर मनोज को डिबार कर दिया गया। ऐसा ही मामला प्रतापगढ़ के कुंडा निवासी सुरेंद्र कुमार पुत्र फूलचंद्र सरोज और बिहार के लखीसराय निवासी मुकेश कुमार पुत्र अरविंद कुमार का पकड़ में आया। इन दोनों के प्रमाण पत्रों की जांच में भी फर्जीवाड़ा पाया गया। इन दोनों ने भी किसी दूसरे को बैठाकर परीक्षा दिलाई थी। आरआरसी प्रयागराज के चेयरमैन अतुल मिश्रा प्रमाण पत्रों की जांच में खुद मामला पकड़ने के बाद अभ्यर्थियों से पूछताछ की। अब तीनों को डिबार कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।




