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बेल पत्र भगवान शंकर को अत्यंत प्रिय: स्वामी महेशाश्रम

(अनुराग शुक्ला)प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। अरैल स्थित नागेश्वर धाम श्री दंडी स्वामी आश्रम में अखिल भारतीय दंड सन्यासी परिषद के संरक्षक जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम ने अनुराग दर्शन समाचार पत्र के संवाददाता से वार्ता करते हुए बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार बेल के पेड़ की उत्पत्ति माता पार्वती के पसीने की बूंदों से हुई थी इसलिए ये भगवान शिव को अत्यधिक प्रिय है। मान्यता है कि सावन के महीने में बेल का पेड़ लगाने और उसका दर्शन करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश हो जाता है। भगवान शिव को तीन पत्तों वाली बेल पत्र अर्पित करना सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि बेल के तीन पत्ते त्रिनेत्रधारी भगवान शिव का रूप होते हैं। ये त्रिगुणों के प्रतीक हैं जिनसे सृष्टि का निर्माण हुआ है। बेल पत्र के मध्य भाग में सभी तीर्थ विराजमान होते हैं, भगवान शिव को बेल पत्र अर्पित करने से सारे तीर्थों की यात्रा का फल मिलता है।
बेल पत्र में संसार के समस्त दैहिक, दैविक और भौतिक तापों को हरने की क्षमता होती है। मान्यता है कि सावन के महीने में नियमित रूप जो शिवलिंग पर जल की धार के साथ बेल पत्र अर्पित करता और बिल्वाष्टकं का पाठ करता है, भगवान शिव उसके तीन जन्मों के पाप हर लेते हैं और मृत्यु के बाद वो व्यक्ति शिवगणों के साथ शिवलोक का आनंद प्राप्त करता है।

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