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श्रावण मास में पूरी होती है कान्हा को हिंडोले में झुलाने की ’तमन्ना’

 

मठ मंदिरों में स्वर्ण, रजत हिंडोले में विराजते हैं ठाकुर जी

गोपाल जी को अपने घरों में भी झूले में झूलते हैं भक्त

मथुरा ( अनुराग दर्शन समाचार ) । सावन मास में ब्रज हरियाली से आच्छादित है। एक अलग ही उमंग का माहौल दिखाई दे रहा है। मंदिरों में ठाकुर जी स्वर्ण, रजत हिंडोलों में विराजमान हैं। गुरु पूर्णिमा पर्व के बाद से ब्रजधाम के बाजारों में दुकानों पर अलग अलग तरह के झूलों की बहार छाई हुई है। वही वृंदावन के कारोबारियों के द्वारा हिंडोलो का बाजार भी सजा दिया गया है। वृंदावन में केवल मंदिरों में हिंडोली ही नहीं सजते बल्कि श्रद्धा भावी लोग अपने घरों में भी ठाकुर जी को हिंडोलो में झूलाते हैं। ऐसे में हिंडोलों का कारोबार यहां खूब चलता है। देश ही नहीं विदेशों में भी हिंडोले भेजे जा रहे हैं। वही झूलों का प्रतीकात्मक रूप बाजार में आए हुए हैं। वही बताया जा रहा है कि इस बार हिंडोलो-झूलों का व्यापार लगभग तीन करोड़ के आसपास रहेगा। अकेले ब्रजभूमि में मंदिरों के दर्शनार्थ देश विदेश से आ रहे लाखों श्रद्धालुओं को यह आकर्षक कलात्मक झूले हिंडोले खूब भा रहे हैं। वही ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के सेवायत नितिन सांवरिया ने बताया कि वृंदावन में भगवान की सेवा पूजा अर्चन आदि सेवा भाव को सर्वोपरि मानकर की जाती है। मौसम के अनुरूप उनकी सेवा पूजा करने का परंपरा हमारे यहां सैकड़ों वर्षो से चली आ रही है। भक्तजन निजी घरों में अपने आराध्य को हिंडोले व झूले में विराजमान कर उन्हें भाव की डोर से झूला झुलाते हैंै। वही हिंडोले के विक्रेता गणेश अग्रवाल ने बताया कि सावन मास में विदेशो में बड़ी संख्या में रह रहे कृष्ण भक्त आराध्य को झूला झुलाने के लिए हिंडोले व झूले मंगाते हैं। हमारे यहां से अमेरिका,ब्रिटेन और फ्रांस में हिंडोले व झूले भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों में भी सप्लाई की जा रही है।

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