पीडीए: करोड़ों की अनियमितता पर जवाब तलब
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से प्रयागराज विकास प्राधिकरण में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता और धन के दुरुपयोग की आॅडिट रिपोर्ट को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि इस प्रकार की अनियमितताएं लगातार हो रही हैं। विभाग ऑडिट टीम को जांच के लिए कई प्रपत्र नहीं दिखाते, जिससे जांच भी पूरी तरह से नहीं हो पा रही है। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति एमएन भंडारी एवं न्यायमूर्ति एकेओझा की खंडपीठ ने हाईकोर्ट बार के उपाध्यक्ष अजय कुमार मिश्र की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है। सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को बताया कि ऑडिट विभाग ने जो आपत्तियां उठाई थीं, उनका निस्तारण कर दिया गया है। लिहाजा याचिका पोषणीय नहीं है। जबकि याची की ओर से अधिवक्ता आरफ खान व लब्ध प्रतिष्ठ मिश्र ने कहा कि पीडीए की प्रत्येक ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय अनियमिताताओं को लेकर आपत्तियां की जा जाती हैं और यह लगातार हो रहा है। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ता है। इतना ही नहीं पीडीए के अधिकारी ऑडिट टीम द्वारा मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराते हैं ।जिससे उनकी जांच नहीं हो पाती है। इससे अनियमितता के कई मामले सामने ही नहीं आ पाते।
याचिका में कहा गया है कि पिछले कई वर्षों से पीडीए के बैंक खातों का मिलान नहीं किया जा रहा है। बीते पांच वर्षों में सरकार खजाने को 32 करोड़ 19 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। पीडीए ने 39.27 करोड़ का सेंटेज चार्ज नहीं वसूला। ब्लैक लिस्ट ठेकेदार को बार-बार काम दिया गया। आडिट रिपोर्ट में आपत्ति उठाई गई है कि ठेकेदारों का कोई लेजर नहीं तैयार किया, सर्विस बुक भी मेनटेन नहीं है। कम्पाउंडिग चार्ज नहीं वसूला गया। इसी प्रकार की तमाम अनिमितताओं से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया है। कोर्ट ने पीडीए को भी तीन सप्ताह में याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।



