जैन मंदिर में पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन श्रावक-श्राविकाओं ने उत्तम आर्जव धर्म की पूजा आराधना की

( विनय मिश्रा )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज दिगंबर जैन पंचायती सभा प्रयागराज के तत्त्वधान में नगर के ज़ीरो रोड स्थित जैन मंदिर में पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन श्रावक-श्राविकाओं ने उत्तम आर्जव धर्म की पूजा आराधना की। इस दौरान विभिन्न जिनालयों में शासन की गाइड लाइन के मुताबिक पूजन-अर्चन किया। प्रात:काल से ही मंदिर जी में पंडित सुनील जैन के निर्देशन में नित्य नियम पूजन अभिषेक एवं शांतिधारा विधि विधान के साथ संपन्न हुयी। इस अवसर पर केसरिया वस्त्रो मे काफी संख्या में श्रद्धालुओ ने भाग लिया। इस
दसलक्षण महापर्व पर पंडित सुनील जैन ने कहा कि जो मन में कुटिल विचार नहीं रखता, कुटिल कार्य नहीं करता, कुटिल बात नहीं बोलता तथा अपना दोष नहीं छिपाता उसे आर्जव धर्म होता है। वचन और काय की सरलता का नाम आर्जव है। सरलता गुणों की खान है। जो मायावी होता है उसका कोई विश्वास नहीं करता और वह मर कर तिर्यंच गति में जन्म लेता है। शाम को मंदिर जी मे संगीतमयी धुनो पर सामूहिक आरती की गयी। एवं इसके पश्चात “मात्र एक मिनट” प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमे विजयी प्रतियोगियो को पुरस्कार दिया गया। कल दिन सोमवार को उत्तम सौच धर्म की पूजा की जायेगी।




