18 महीने से जिले में खेल मैदानों से खिलाड़ी दूर

18 महीने से खेल प्रशिक्षको को खेल विभाग ने उनके घर पर बैठाया
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। जिले में खेलों की स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई है
पिछले 18 महीने से प्रयागराज जिले में खेल मैदानों से खिलाड़ी दूर हैं क्योंकि पिछले 18 महीने से खेल प्रशिक्षको को खेल विभाग ने उनके घर पर बैठा रखा है जबकि नियमता उनका ऑटो रिनुअल अप्रैल 2020 को होना था, लेकिन खेल विभाग ने अभी तक उनको ऑटो रिनुअल नहीं किया है, जिस वजह से खेल प्रशिक्षकों के सामने जीवन यापन की समस्या उत्पन्न हो गई है । और साथ ही मैं बताना चाहता हूं कि, इस समय प्रयागराज जिले में खेल मैदानों की स्थिति बहुत ही बत्तर है खो खो, कबड्डी, हैंडबॉल, वॉलीबॉल, सॉफ्ट टेनिस, ताइक्वांडो, बॉक्सिंग, क्रिकेट स्विमिंग, रोइंग आदि खेलों में ना ही कोई खेल प्रशिक्षक है और ना ही कोई सुविधाएं दी जा रही है। जबकि खेल विभाग में बहुत से ऐसे खेल प्रशिक्षक हैं । जिन्होंने संपूर्ण जीवन खेल को समर्पित कर दिया है लेकिन आज उनके साथ खेल विभाग बहुत ही बुरा बर्ताव कर रहा हैI हैंडबॉल खेल, के खेल प्रशिक्षक संजय श्रीवास्तव का कहना है प्रयागराज मंडल में हैंडबॉल के बहुत अच्छे-अच्छे खिलाड़ी दिए हैं, लेकिन आज ना ही यहां पर खेल प्रशिक्षक है और ना ही खेल सुविधाएं जबकि हैंडबॉल प्रशिक्षक संजय श्रीवास्तव ने अपना पूरा जीवन हैंडबॉल के लिए समर्पित कर दिया था लेकिन आज वह बहुत ही निराश हैं। इस समय अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए प्रशिक्षण का कार्य छोड़कर वह अन्य कार्य जीवकोपार्जन के लिए कर रहे हैं। पिछले 18 महीने से रिनुअल व वेतन न मिलने के कारण खेल प्रशिक्षक भुखमरी के कगार पर आ गए हैं। और कुछ खेल प्रशिक्षक जीवन यापन के लिए अलग-अलग कार्यों में लग गए हैं जैसे की जूस की दुकान, चाय की दुकान, मजदूरी और खेती किसानी आदि। जबकि मार्च 2020 में कोविड महामारी के सुरुवात में प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री ने कहा था कि किसी को न ही नौकरी से निकाला जाय और न ही वेतन कटौती की जाय, जबकि उत्तर प्रदेश खेल निदेशालय ने इसके विपरीत ही कार्य किये। यही हाल प्रयागराज मंडल में लगभग सभी गेमों में है यहां पर खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा नहीं है और ना ही उनके लिए कोई खेल प्रशिक्षक नियुक्त है। जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश खेलों में उत्तम प्रदेश बने लेकिन इस अवस्था को देख कर तो लगता है कि उत्तर प्रदेश कभी भी उत्तम प्रदेश नहीं बन पाएगा।
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