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भक्ति की कक्षा में प्रवेश करने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती- स्वामी घनश्यामाचार्य जी

(अनुराग शुक्ला) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। मलाक हरिहर में परमात्मा राम पाण्डेय के निज निवास में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह कथा में व्यास पीठ पर विराजमान जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री स्वामी घनश्यामाचार्य जी महाराज ने तृतीय दिवस की कथा में ध्रुव चरित्र की व्याख्या करते हुए बताया कि भक्ति की कक्षा में प्रवेश करने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती ध्रुव जी अल्प अवस्था में ही भक्तों के सिरमौर बन गए अपने कुल परंपरा के संस्कार जब हम अपनी आगे आने वाली पीढ़ी को प्रदान करेंगे तभी वह संतान आगे चलकर संस्कारवान होगी। संस्कार विहीन मनुष्य पशु के श्रेणी में आता है आज हम अपनी युवा पीढ़ी को उन शिक्षा व्यवस्था से दूर करते जा रहे हैं। जिससे उनके जीवन में आध्यात्मिक चेतना जागृत हो सकती है। इसी का परिणाम है आज गलत नशा और अपराध की प्रवित्ति बढ़ती जा रही है । इसे रोकने के लिए हमें ही प्रयास करना होगा पूज्य महाराज श्री ने बताया कि हम कितने भी ऊंचे पद पर पहुंच जाय परन्तु नीचे जमीन की तरफ देखते रहे जिससे पद का अहंकार न आने पाए।

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