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रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन में बाल दिवस का कार्यक्रम धूमधाम से संपन्न

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) l रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज ,राजापुर, प्रयागराज के संगीताचार्य एवं मीडिया प्रभारी मनोज गुप्ता की सूचनानुसार विद्यालय प्रांगण में बाल दिवस आज एक दिन पूर्व बहुत धूमधाम से आकर्षक एवं मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया गया ,इस अवसर पर पूरे विद्यालय को फूल मालाओं एवं रंगीन गुब्बारों से सजाया गया ।
कार्यक्रम को दो चरणों में संपादित किया गया ,पहले चरण में ऋचा गोस्वामी के नेतृत्व में पायल जायसवाल ,किरन सिंह ,शंकरलाल ,शशि कपूर गुप्ता एवं अभिषेक शुक्ला ने शिशु से पंचम तक के समस्त छात्र छात्राओं को सुमित्रानंदन पंत बाल उद्यान में भ्रमण कराया और उन्हें नाश्ते का पैकेट वितरित किया। दूसरे चरण का कार्यक्रम विद्यालय प्रांगण में संपन्न हुआ, जिसमें षष्ठ से द्वादश तक के समस्त छात्र छात्राओं को पेन और बिस्किट का पैकेट वितरित किया गया, तत्पश्चात विद्यालय प्रांगण में कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना एवं पंडित जवाहरलाल नेहरू एवं वीर बालकों फतेह सिंह एवं जोरावर सिंह के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ । तत्पश्चात कक्षा द्वितीय के छात्र आयुष पांडे ने सुमधुर भजन एवं आस्था पांडे ,अनुष्का पांडे ,प्रगति गुप्ता एवं शुभ्रा पाल के गीतो ने सब को भावविभोर कर दिया l इसी क्रम में संगीताचार्य मनोज गुप्ता ने छात्र-छात्राओं को समर्पित गीत “बच्चे मन के सच्चे ,सारी जग की आंख के तारे” प्रस्तुत कर मंत्रमुग्ध कर दिया, इसके बाद विद्यालय की शिक्षिका अर्चना राय ने पंडित जवाहरलाल नेहरू तथा बाल दिवस के बारे में विस्तार से छात्र छात्राओं को बताया । अंत में प्रदीप- रिचा फाउंडेशन ,नई दिल्ली द्वारा 2 वर्षीय छात्रवृत्ति के लिए चयनित ईशान पांडे, ज्योति गौड़ एवं ऋषभ पांडे को विद्यालय के प्रधानाचार्य बांके बिहारी पांडे ने सम्मानित करते हुए बाल दिवस के साथ-साथ फतेह सिंह एवं जोरावर सिंह के बारे में बताते हुए कहा कि जब जोरावर सिंह व फतेह सिंह को किले की नींव में खड़ा करके उनके आसपास दीवार चिनवानी प्रारम्भ कर दी तो
दीवार बनते-बनते जब फतेह सिंह के सिर के निकट आ गई तो जोरावर सिंह दुःखी दिखने लगे। काज़ियों ने सोचा शायद वे घबरा गए हैं जब उनसे दुःखी होने का कारण पूछा गया तो जोरावर बोले मृत्यु भय तो मुझे बिल्कुल नहीं। मैं तो सोचकर उदास हूँ कि मैं बड़ा हूं, फतेह छोटा हैं ,दुनियाँ में मैं पहले आया था। इसलिए यहाँ से जाने का भी पहला अधिकार मेरा है। फतेह को धर्म पर बलिदान हो जाने का सुअवसर मुझ से पहले मिल रहा है। कार्यक्रम का कुशल एवं सधा हुआ संचालन सत्य प्रकाश पांडे ने किया ।

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