फिल्म एप्रिसिएशन कोर्स कार्यशाला का शुभारंभ

(अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। फिल्में समाज को आइना दिखाती हैं, एक दर्शक का और एक फिल्मकार का फि़ल्म को लेकर नज़रिया अलग-अलग होता है। फिल्में कैसे बनती है, उसके क्या जरूरी घटक है, उसके पीछे कितनी मेहनत है, यह सब सिर्फ फि़ल्म लाइन से जुड़े लोग ही जानते हैं। एक फिल्मकार फि़ल्म की स्क्रिप्ट से लेकर उसके बनने के हर पहलू पर अपना दिष्टिकोण रखता है। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्.तिक केन्द्र, प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और फि़ल्म एवं टेलीविजन संस्थान, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में प्रयागराज में फि़ल्म एप्रिसिएशन कोर्स का शुभारंभ आज १५ नवम्बर से सांस्.तिक केन्द्र के प्रेक्षागृह में दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। पांच दिवसीय इस कार्यक्रम को पुणे के एसोसिएट प्रोफेसर अनुपम बर्वे के निर्देशन में किया जाएगा। आज कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थ्ज्प्प्, पुणे के प्रोफेसर और फि़ल्म प्रोड्यूसर मिलिंद दामले रहे। उन्होंने कहा कि हर फिल्मकार का फिल्मों को बनाने का तरीका भिन्न हो सकता है, इसीलिए इस कोर्स का उद्देश्य भी बढ़ जाता है। कोविड के बाद अधिकतर कोर्स ऑनलाइन हो गए थे, पर अब फि़ल्म एवं टेलीविजन संस्थान का प्रयास है कि विभिन्न जगहों पर फि़ल्म एप्रिसिएशन कोर्स चलाये जाएं, जिससे फिल्मों में अभिरुचि रखने वाले लोग फि़ल्म निर्माण की बारीकियों को समझ सकें। इस कार्यक्रम में भारत वर्ष के विभिन्न राज्यों के ६० से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। सांस्.तिक केन्द्र के अधिकारी आशीष श्रीवास्तव ने केन्द्र निदेशक की ओर से कोर्स निदेशक और मुख्य अतिथि एवं प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित तथा मंच संचालन मधुकांक मिश्रा ने किया।


