मांडा के जंगलों का अस्तित्व खनिज माफियाओं के भेंट चढा

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। जमुना पार के मेजा तहसील, उरूवा, मांडा, विकासखंड के क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों के अमूल्य धरोहर नदी,जंगल,पहाड़, प्रकृति द्वारा दिया गया वह मुफ्त उपहार है। जिस पर समूचे मेजा वासियों को गर्व है।
टोंस और कर्णवती नदी सहित पहाड़ों व प्राकृतिक जल स्रोतों का अस्तित्व ही खतरे में
विंध्य पर्वत की श्रृंखला टोंस नदी कर्णावती नदी और पतित पावनी मां गंगा के निर्मल जलधारा के बीच पहाड़ों पर स्थित छोटे-छोटे रमणीय स्थल जलकुंड मंदिर मेजा के वह अमूल्य धरोहर हैं। जिसकी सुरक्षा और संरक्षा दोनों बहुत जरूरी है। परंतु यह दुर्भाग्य का कारण है कि आज दिन-रात जहां एक ओर हजारों मजदूरों मशीनों के दम पर मेजा क्षेत्र के पहाड़ों का नामोनिशान मिटा देने पर उतारू खनिज माफियाओं के चलते टोंस और कर्णवती नदी सहित पहाड़ों व प्राकृतिक जल स्रोतों की उपलब्धता का अस्तित्व ही खतरे में हैं। वही मां गंगा का तट भी उजाड़ और वीरान सा है। मांडा से कोरांव मार्ग पर स्थित देवकुंडे नाथ का वह अद्भुत जल स्रोत अपना अस्तित्व खो चुका है। जिसका एक अंजुल पानी गैस बदहजमी के मरीजों के लिए अमृत के समान था। यही नहीं गर्मियों के दिनों में दूर-दूर से लोग दाल-बाटी चोखा का आनंद उठाने के लिए यहां पर आते थे।यही हाल मेजा की पहाड़ी पर स्थित पौराणिक बोलन धाम व पौराणिक पहड़ी महादेव मंदिर भटौती का भी है।इनके साथ बंगलिया पहाड़ पर स्थित पौराणिक शिव मंदिर का अस्तित्व भी खनिज माफियाओं के भेंट चढ़ चुका है। मांडा के जंगलों का वह प्रसिद्ध बांस जिसकी लाठी बनाने के लिए आस-पास के जिले के लोग भी आते थे।

