रिज़र्व बैंक के देश के व्यापार एवं लघु उद्योग को जीवित रखने के लिए पूँजी देने का कैट ने स्वागत किया

प्रयागराज। रिज़र्व बैंक के गवर्नर श्री शक्तिकांता दास द्वारा आज की गई विभिन्न घोषणाओं का कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने स्वागत करते हुए कहा की कोरोना से भयभीत इस वातावरण में इन घोषणाओं से न केवल व्यापारियों बल्कि देश के अन्य लोगों को भी लाभ मिलेगा और सभी लोग वित्तीय देनदारी से फिलहाल मुक्त होंगे ! केंद्र सरकार का यह कदम विभिन्न वर्गों को रियायतें देने की श्रंखला का एक अन्य बड़ा कदम है !
कैट के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र गोयल एवं महामंत्री अजय अग्रवाल ने इन घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा की मुद्रास्फीति को एक तरफ रखते हुए रिज़र्व बैंक ने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाये हैं जो इस वर्तमान संकट में बड़ी राहत देंगे ! उन्होंने कहा की सीआरआर कम होने से ब्याज की दरें कम होगी. बैंकों के पास अत्यधिक पैसा आएगा . बैंकों के पास पैसे की तरलता बढ़ेगी और बैंक अधिक से अधिक लोगों को ऋण देने के लिए तैयार होगी जिससे बाजार में भी पैसा आएगा और बाजार में नकद तरलता बढ़ेगी !
महेन्द्र गोयप ने कहा की रिवर्स रेपो रेट बहुत ज्यादा कम कर दिया है. इसका मतलब बैंक अब रिजर्व बैंक में पैसा रखने के बजाय मार्केट में कर्ज बढ़ाएगी। टर्म लोन हो, कैश क्रेडिट हो, या ओवरड्राफ्ट लिमिट हो ,सभी के ऊपर लगने वाला ब्याज 3 माह के लिए स्थगित कर दिया गया है। यह एक बहुत ही बड़ा कदम है जिससे व्यापारियों को बड़ी सहायता मिलेगी !
दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा की सभी बैंक लोन, ईएमआई तथा ब्याज को आगे स्थगित करने से देश के व्यापार एवं लघु उद्योग को व्यापार के नए अवसर मिलेंगे और घरेलू व्यापार बढ़ेगा वहीँ वर्किंग कैपिटल को रिवर्क करने को कहा है। इसका मतलब है कि अगर हमे अतिरिक्त पैसा चाहिए तो हम बैंक के पास जाकर, हम अपनी मांग रख सकते हैं जिसे बैंकों द्वारा स्वीकार करने से काम करने के लिए पूँजी उपलब्ध होगी । हाउसिंग लोन को भी बढ़ा देने से आम जनता के पास भी पैसे आएंगे और बाजार में तेजी आएगी।
इसके साथ ही बाजार में पैसे की तरलता बढ़ाने के लिए सुझाव दिए हैं उससे बाजार में रू 3.74 लाख करोड़ और पैसा आएगा और कल वित्त मंत्री द्वारा 1 .70 लाख करोड़ का पैकेज देने के बाद लगभग 5 .5 लाख करोड़ रुपये का प्रवाह बाजार में होगा जिसके अच्छे परिणाम की उम्मीद है वहीँ व्यापारियों के कोई भी अकाउंट एनपीए नहीं होंगे।यह जो रिस्ट्रक्चरिंग होगा यह सिबिल में रिपोर्ट नहीं होगा। कुल मिलाकर सरकार ने व्यापार, उद्योग और लघु उद्योग को संकट के इस समय सहायता देने में कोई कोताही नहीं बरती है।



