शिल्प मेले में रंग-रगीले राजस्थान की बहुरंगी सांस्कृतिक की छटा से भाव विभोर हुए दर्शक

किशनगढ़ से पधारे वीरेन्द्र सिंह गौड़ एवं उनके दल द्वारा चरी एवं घूमर नृत्य के माध्यम से जलवा बिखेरा
यादव समुदाय द्वारा एक माला के रूप में पिरोकर फरवही नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया
(अनुराग शुक्ला


) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। राष्ट्रीय शिल्प मेला अपनी रवानगी पे आने लगा है, मेले के चौथे दिन भी लोगों की तादात हजारों की संख्या में देखने को मिली है। महिलाओं का आकर्षण एवं हस्तशिल्प व घर के साज-सज्जा की वस्तुएं रहीं, वहीं युवाओं को लजीज व्यंजनों ने अपनी ओर आकर्षित किया। मेले में आये प्रत्येक व्यक्ति के लिए आकर्षण का खास विषय सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा।कार्यक्रम के शुभारम्भ में सांसद केशरी देवी पटेल के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर चतुर्थ संध्या का शुभारम्भ किया गया। केन्द्र परिवार की ओर से तथा कलाकारों की ओर से केन्द्र निदेशक द्वारा मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र से स्वागत और अभिनंदन किया गया।कार्यक्रम के शुभारंभ में आश्रया द्विवेदी द्वारा माँ विन्ध्यवासिनी को समर्पित देवी गीत व कजरी की प्रस्तुति की गयी वहीं छत्तीसगढ़ भाषा शैली में पाण्डवों की कथा को गाकर प्रस्तुत करने की परम्परा पाण्डवानी गायन के अन्तर्गत सुपरिचित पाण्डवानी गायिका सम्प्रिया पूजा द्वारा अपनी मधुर आवाज और अनूठे अंदाज में द्रौपदी चीर हरण के प्रसंग को जीवंत किया। मध्य प्रदेश के खण्डवा जनपद से पधारी श्रीमती साधना उपाध्याय एवं उनकी सखियों के द्वारा शिव और पार्वती को समर्पित गणगौर नृत्य की प्रस्तुति दी गयी। उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जनपद की माटी की सोंधी महक, यादव समुदाय द्वारा एक माला के रूप में पिरोकर फरवही नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। रंग-रगीले राजस्थान की बहुरंगी सांस्कृतिक छटा को किशनगढ़ से पधारे वीरेन्द्र सिंह गौड़ एवं उनके दल द्वारा चरी एवं घूमर नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। वहीं नवजात शिशु के जन्म के अवसर पर पंवरिया और सोहर की परम्परा को बिहार के हरि कृष्ण एवं दल ने बड़ी ही खूबसूरती से नृत्य और गायन के माध्यम से प्रस्तुत किया। इसी कड़ी में स्थानीय कलाकारों ने भी अपने लोकगीत एवं लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम के अन्त में केन्द्र निदेशक ने सभी उपस्थित दर्शकों एवं श्रोताओं के साथ मुख्य अतिथि का भी धन्यवाद ज्ञापित किया।




