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युवा मंच प्रतिनिधि मंडल की चयन बोर्ड उपसचिव से हुई वार्ता

 

15 जनवरी तक टीजीटी पीजीटी विज्ञापन का दिया आश्वासन

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। भारी बारिश के चलते चयन बोर्ड पर युवा मंच के पूर्व घोषित आंदोलन को स्थगित के बाद युवा मंच प्रयागराज ईकाई सचिव शीतला ओझा के नेतृत्व में 5 सदस्यीय टीम ने उपसचिव श्री नवल किशोर से वार्ता की। वार्ता में उन्होंने 15 जनवरी तक टीजीटी पीजीटी-2022 विज्ञापन जारी करने की उम्मीद जताई। बताया कि विज्ञापन के संबंध में चयन प्रक्रिया पहले से जारी है ऐसे में आचार संहिता लागू होने से विज्ञापन जारी करने में किसी तरह की समस्या नहीं है। हालांकि युवा मंच आशंका जताई है कि आचार संहिता के बाद विज्ञापन जारी होने में समस्या पैदा हो सकती है, इस लिये चयन बोर्ड व सरकार से यह भी मांग की गई है कि चुनाव आयोग से विज्ञापन जारी करने के संबंध में किसी तरह की रोक नहीं होने संबंधी दिशा निर्देश चुनाव आयोग से प्राप्त किया जाना चाहिए जिससे युवाओं की विज्ञापन के फंसने की आशंका व चिंता दूर की जा सके। वार्ता के पूर्व प्रतियोगियों ने चयन बोर्ड पर विज्ञापन जारी करने, तदर्थ शिक्षकों के 22 हजार पदों को प्रस्तावित विज्ञापन में जोड़ने के लिए नारेबाजी कर आवाज बुलंद की गई। इस दौरान प्रयागराज ईकाई युवा मंच सचिव शीतला ओझा, ध्रुव कुमार चौधरी, आलोक शुक्ल, ओम प्रकाश, ज्ञान प्रकाश सिंह, मृत्युंजय तिवारी आदि मौजूद रहे।प्रेस को जारी बयान में युवा मंच अध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि ऐडेड माध्यमिक विद्यालयों में मुख्यमंत्री द्वारा 2 जुलाई को 27 हजार पदों पर चयन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की गई थी, लेकिन इस घोषणा के सापेक्ष चयन बोर्ड के अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार बेहद कम पदों पर अधियाचन प्राप्त हुआ है जो कि चिंताजनक है। इसके अलावा जिन 22 हजार तदर्थ शिक्षकों का ब्यौरा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद नये विज्ञापन में इन 22 हजार पदों को भी जोड़ने में आनाकानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि 27 हजार पदों से कम विज्ञापन मंजूर नहीं किया जायेगा, जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा की गई थी। उन्होंने कहा कि अगर तदर्थ शिक्षकों के पदों को नये विज्ञापन में नहीं जोड़ा गया तो इस मामले को सुप्रीम कोर्ट की शरण में युवा ले जायेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों, चयन बोर्ड व सरकार की मिलीभगत से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी तदर्थ शिक्षकों को हटाया नहीं जा रहा है जो कि नये विज्ञापन में सबसे बड़ी बाधा है।

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