प्रथम स्नान पर्व नजदीक आने के बावजूद आधी-अधूरी तैयारी






कल्पवासियों के शिविरों को बसाने का काम अभी तक नहीं हो सका शुरू
कई तीर्थपुरोहितों को अभी भूमि तक नहीं मिली
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। माघ मेले के प्रथम स्नान पर्व मकर संक्रांति में अब सिर्फ तीन दिन शेष रह गए हैं, लेकिन संगम की रेती पर अभी शिविरों को बसाने का काम पूरा नहीं हो सका है। गाटा मार्गों पर तार-खंभे तक नहीं पहुंच सके हैं। पेयजल लाइनें बिछाने का काम भी अधूरा है। ऐसे में यही हाल रहा तो मेला शुरू होने पर लाखों कल्पवासियों और साधु-संतों की फजीहत होनी तय है। प्रथम स्नान पर्व का समय नजदीक आने के बावजूद आधी-अधूरी तैयारी से कल्पवासियों के शिविरों को बसाने का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है। कई तीर्थपुरोहितों को अभी भूमि तक नहीं मिल सकी है। काली मार्ग पर तुलसी चौराहा और प्रयागवाल थाना से आगे विद्युतीकरण का काम न होने से गिनती के लगे शिविरों में अंधेरा है। ऐसे में नए टेंट खड़ा करने में दिक्कतें आ रही हैं।
*गाटा मार्गों पर इंतजाम अब तक नदारद*
गाटा मार्गों पर बिजली के तार-खंभे नहीं पहुंच सके हैं। मौसम की खराबी और ठेकेदारों की सुस्ती से काम पिछड़ता जा रहा है और संतों-भक्तों की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। अरैल में भी अभी तक सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। लाइट न लग पाने की वजह से मेले में प्रवेश करने वाले मार्गों पर शाम होते ही अंधेरा छा जा रहा है। ऐसे में मध्यप्रदेश और मिर्जापुर के अलावा अन्य इलाकों से आने वाले श्रद्धालुओं और कल्पवासियों को जबरदस्त दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
*बिजली और पानी की भी नहीं है व्यवस्था*
बड़ी संख्या में कल्पवासी अरैल तट पर भी महीने भर कल्पवास करते हैं, लेकिन तैयारियां अधूरी होने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह सेक्टर तीन, चार और पांच में भी सुविधाओं का अभाव है। गिनती के शिविरों में बिजली, पानी न होने और चकर्ड प्लेट मार्गों के कीचड़ से सराबोर होने की वजह से लोगों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई सड़कों पर चकर्ड प्लेट न बिछने और पानी का कनेक्शन न होने से लोग परेशान हैं। दलदल में तब्दील मार्गों और मेला क्षेत्र में बालू न पाटे जाने की वजह से न तो लोग चल पा रहेे हैं और ना ही शिविर लग पा रहेे हैं। जल निगम की पेयजल लाइनें तो मुख्य मार्गो प सेक्टरवाइज बिछा दी गई हैं, लेकिन नल लगाए जाने के स्थान तक चिह्नित नहीं किए गए हैं। जगह-जगह पाइप ऐसे ही पड़ी हुई हैं। घाटों के समतलीकरण का काम अभी भी अधूरा है। इस सुस्त चाल से हर कोई परेशन है।




