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माघ शब्द माध से बना है, जिसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण के माधव स्वरूप से है- स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने माघ मास का माहात्म्य बताते हुए कहा कि माघ मास में प्रयागराज में गंगा स्नान एवम् दान का बहुत महत्व है | हिंदू कैलेंडर के अनुसार ये वर्ष का ग्यारहवां महीना है | धार्मिक दृष्टिकोण से इसका बहुत महत्व है | माघ शब्द माध से बना है, जिसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण के माधव स्वरूप से है | इस महीने को बहुत पवित्र माना जाता है | पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि इस माह में गंगा स्नान करने से सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है |माघ मास के पौराणिक महत्व के विषय में पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि माघ मास में संगम पर कल्पवास करने की परंपरा है | इससे व्यक्ति शरीर और आत्मा से नया हो जाता है | जो भी व्यक्ति इस माह स्नान, दान, और जप,तप करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है | पद्मपुराण के अनुसार पूजा करने से भी भगवान श्रीहरि को उतनी प्रसन्नता नहीं होती, जितनी माघ महीने में स्नान मात्र से होती है | यदि अक्षमता के कारण कोई ब्यक्ति पवित्र गंगा स्नान नहीं कर सकता, तो इस महीने सुबह जल्दी उठकर स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर उससे स्नान करें | माघ के महीने में भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा से विशेष लाभ होता है. माघ मास में गर्म पानी को धीरे-धीरे छोड़कर सामान्य जल से स्नान करना शुरू कर देना चाहिए | इस महीने से भारी भोजन छोड़कर सादा भोजन करना चाहिए | इस महीने में तिल और गुड़ का प्रयोग विशेष लाभकारी होता है | इस माह में सिर्फ एक समय भोजन करने से आरोग्य और एकाग्रता की प्राप्ति होती है |

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