
प्रयागराज। तंत्रवारिधि,साधक शिरोमणि माँ बंगलामुखी उपासक महंत बजरंगमुनि उदासीन ने बताया कि 482 वर्ष बाद यानी 2019 को पूरे साल में तीन शनैश्चरी अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। पहली शनैश्चरी अमावस्या जनवरी को थी, दूसरी शनैश्चरी अमावस्या चार मई को पड़ रही है। वैशाख माह और शनि का दिन होने के कारण इसकी महत्ता कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है। इस शनेश्चरी अमावस्या पर ग्रह नक्षत्रों का संयोग बन रहा है।
इस समय शनि महाराज वक्री होकर मंगल से षडाष्टक कर रहे हैं और केतु के साथ बैठे हैं। राहू के साथ समसप्तक कर रहे हैं यह प्रलयंकारी योग बन रहा है। कई देशों में भूकंप, बाढ से तबाही के संकेत मिल रहे है। अग्निकांड और प्राकृतिक प्रकोप से जन-धन की हानि तो बड़े राजनीतिक दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगेगी। राजनीति में नए समीकरण भी बनेंगे।
रत्न – नीलम : रुद्राक्ष – सात मुखी रुद्राक्ष : जड़ी – धतूरे की जड़
शनि का वैदिक मंत्र :
ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।
शं योरभि स्त्रवन्तु न:।।
शनि का तांत्रिक मंत्र :
ॐ शं शनैश्चराय नमः।।
शनि का बीज मंत्र :
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।




