सतुआ बाबा आश्रम एक ऐसा आश्रम जहां पर मुर्दे भी दंडवत करते हैं

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। माघ मेला महावीर मार्ग पर सतुआ बाबा आश्रम का कैंप लगा हुआ है। जैसे ही भक्तों को सतुआ बाबा की फोटो दिखाई देती है। उनके दिल में मृत्यु पर कैसे विजय पाया जा सकता है। इसके बारे में जानने के लिए हमे काशी में बताया जाता है। सतुआ बाबा आश्रम एक ऐसा आश्रम है जहां पर मुर्दे भी दंडवत करते हैं। इस विषय में जानकारी लेने के लिए अनुराग दर्शन समाचार के संपादक ने सतुआ बाबा आश्रम के संचालक महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा से मुलाकात की। सतुआ बाबा के जीवन और उनके विचारों के बारे में जानकारी एकत्रित की। महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा ने बताया काशी में मृत्यु प्राप्त करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन बहुत कम ही लोगों को इस बात की जानकारी होगी कि दुनियां में एक ऐसी जगह काशी में है, जहां मुर्दे भी दंडवत प्रणाम करते हैं। उसके बाद ही उन्हें मुक्ति के लिए मार्ग प्रशस्त होता है। महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा ने कहा दरअसल शास्त्रों में वर्णन मिलता हैं कि मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार करने से मृतकों को मोक्ष मिलता है। काशी में सतुआ बाबा का आश्रम घाट से दस कदम पहले है। इस पवित्र स्थली पर शिव ने वृद्ध बनकर बाबा को दर्शन दिया था। मणिकर्णिका घाट पर उसी के बाद से मुर्दे प्रणाम करने के बाद ही आगे बढ़ते हैं और संस्कार घड़ा भी यही फोड़ा जाता हैं।
*जानिए क्या हैं वह दिलचस्प परंपरा, कैसे हुई इसकी शुरूआत*
महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा ने बताया सतुआ बाबा के आश्रम की स्थापना 18वीं शताब्दी में हुई थी। इस आश्रम के अंदर एक शिवाला है जहां 2652 वर्षों पहले विष्णुस्वामी संप्रदाय के आघाचार्य जगत गुरु अनंतश्री विभूषित भगवान विष्णु स्वामी जी महाराज पधारे थे, प्राचीन मानचित्र से इसका विवरण मिला है। इस स्थान पर जगत गुरु आदि शंकराचार्य जब अपने गुरु गोविन्दाचार्य जी कि आज्ञा से काशी आए थे तब इसी जगह चांडाल वेशधारी महादेव ने उनकी परीक्षा ली थी।


