आज गुरु हो जाएंगे अस्त 53 दिनों तक नहीं होंगे मांगलिक कार्यक्रम

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। एक बार फिर 53 दिन तक शहनाई नहीं बजेगी। ऐसा देवगुरु बृहस्पति के अस्त होने के साथ होलाष्टक और सूर्य के मीन राशि में आने से मीन का मलमास लगने के कारण होगा। इसके बाद 23 फरवरी से 16 अप्रैल तक 53 दिनों तक शहनाई नहीं बजेगी। ज्योतिषी पं. देवराज शुक्ला के अनुसार 23 फरवरी से 20 मार्च तक बृहस्पति अस्त रहेंगे। इस बीच आठ दिवसीय होलाष्टक दस मार्च से और मीन का मलमास लगने से 14 मार्च से 14 अप्रैल तक विवाह नहीं होंगे। इस कारण विवाह के दूसरे सत्र का पहला मुहूर्त 17 अप्रैल को होगा। अप्रैल में छह मुहूर्त, मई में 13, जून में दस और जुलाई में चार मुहूर्त होंगे। इसके बाद दस जुलाई से चातुर्मास शुरु होगा। समें मांगलिक कार्यों पर चार माह के लिए विराम लग जाएगा। ज्योतिषी पं. देवराज शुक्ला ने बताया कि गुरु, धनु और मीन के स्वामी है। यह कर्क राशि में उच्च का और मकर राशि में शनि देव की राशि में नीच का ग्रह माना जाता है। विवाह में बृहस्पति ग्रह का उदय होना आवश्यक माना गया है। सोलह संस्कारों में विवाह एक महत्वपूर्ण संस्कार है। विवाह का दिन तय करने मे वर और वधु की जन्म कुंडली के अनुसार सूर्य, चंद्रमा और गुरु की गोचर स्थिति का ध्यान रखना आवश्यक है। इसे त्रिबल शुद्धि कहते हैं। बृहस्पति को शुभ फलदायी ग्रह माना गया है। जन्म कुंडली में गुरु की स्थिति शुभ होने पर व्यक्ति को सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है। गुरु के कमजोर होने पर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।


