भावनाओं की शुद्धता ही आत्मशुद्धि आचार्य विमर्श सागर

लखनऊ ( अनुराग दर्शन समाचार )। जैन आचार्य श्री विमर्श सागर का ससंघ मंगल प्रवेश आशियाना जैन मन्दिर रविवार को गाजे बाजे के साथ हुआ। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य अंकित जैन परिवार को मिला। शास्त्र भेंट पंकज जैन, पुनीत जैन और प्रमोद जैन ने किया और आरती जैन महिला मण्डल ने भक्ति भाव से किया। शान्तिधारा का सौभाग्य याहियागंज के राजेश जैन को मिला। आचार्य विमर्श सागर ने प्रवचन में कहा कि जब मानव में क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी विकृतियों को लोप होता है तब सदवृत्तियों की उत्पत्ति से धर्म आलोकित होता है। धर्म में उपयोग ही मोक्षदायी है।भावनाओं की शुद्धता ही आत्मशुद्धि व मुक्ति का मार्ग है। सभा को संम्बोधित करते हुए उ.प्र. जैन विद्या शोध संस्थान के अपाध्यक्ष प्रो. अभय कुमार जैन ने कहा कि जैन धर्म संस्कृति में चौबीसवें व अन्तिम तीर्थंकर महावीर के सिद्धांत दया, करुणा, अहिंसा, शाकाहार मानव को कुरीतियों से बचाकर परस्पर प्रेम और मैत्री को सुदृण करते हैंं। प्रो. जैन ने कहा कि वर्तमान महायुद्ध हिंसा का खुला ताण्डव है। महावीर के सिद्धांत अहिंसा और अनेकान्त में हैं युद्ध समाप्त कर शान्ति का समाधान।
धार्मिक आयोजन में आशियाना समाज के संयोजक बृजेश जैन बन्टी, उपाध्यक्ष अनुज जैन, मंत्री अजय जैन, कोषाध्यक्ष अनिल सौगानी ,चौक से कैलाश जैन, आदीश जैन, बारबंकी से मनोज जैन, इन्दिरा नगर से अभिषेक जैन , महिला मण्डल की अल्पना, ऋतु, सरिता, सविता, अमिता, राखी, साधना ,वीना, सुमन ,मीनू अभिलाषा, सुधा, मनीषा जैन आदि सैकड़ों की संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।




