विचारों का आदान प्रदान सीखने-सिखाने में सहायक : निदेशक

सहज, सरल व आनन्दित अध्यापक से ही ऊर्जा का संचार
( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज( अनुराग दर्शन समाचार )। विकास खण्ड स्तर पर अच्छे अध्यापकों में से अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ए.आर.पी.) का चयन किया जाता है। इनमें अन्य अध्यापकों की तुलना में अधिक ज्ञान होना चाहिये। वे अध्यापकों को सिखाएं जिससे अध्यापक बच्चों को सिखा सकें। सिखाने के लिए सुनना बहुत आवश्यक है। विचारों का आदान-प्रदान सीखने-सिखाने में सहायक होता है। बच्चों के साथ अध्यापक को सहज सरल और आनन्दित रहना चाहिए , जिससे उनमें ऊर्जा का संचार हो सके।
उक्त विचार राज्य शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीमैट) उप्र प्रयागराज की निदेशक डॉ. सुत्ता सिंह ने नवनियुक्त अकादमिक रिसोर्स पर्सन के अन्तिम चक्र को सम्बोधित करते हुए शनिवार को व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बच्चे करके सीखते हैं। ऐसे में बच्चों को रोकना नहीं चाहिए । इससे बच्चों के उत्साह में कमी आती है। सुधार के लिए सबसे पहले बच्चों के सद्गुणों से प्रारम्भ करें, यदि कोई कमी है तो धीरे-धीरे उसे इंगित करें।
निदेशक ने आगे कहा कि पारिवारिक परिवेश तथा संस्कार के आधार पर हम नजरिया बनाते हैं। लोगों से मिलने से नई सोच तथा दिशा प्राप्त होती है। शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए प्रशिक्षणों में हम प्रातःकाल योग तथा ध्यान से सम्बन्धित सत्रों का आयोजन करते हैं। जिससे यह ज्ञान एआरपी तथा अध्यापकों के माध्यम से बच्चों तक पहुंचे।
प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण अत्यंत उच्च कोटि का रहा है। जनपद तथा विकास खण्ड स्तर की अनेक समस्याओं का हल इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्राप्त हुआ है। इसका लाभ विद्यालय स्तर पर गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने में आवश्यक होगा।
कार्यक्रम समन्वयक प्रभात कुमार मिश्रा ने बताया कि इस अन्तिम चरण के प्रशिक्षण के साथ ही प्रदेश के समस्त जनपदों से लगभग 1000 एआरपी को प्रशिक्षित किया गया है। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष, डॉ. अमित खन्ना, प्रवक्ता, पवन सावन्त तथा पुस्तकालयाध्यक्ष, सरदार अहमद उपस्थित रहे।



