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धूप की तपिश और बिजली की बार-बार की कटौती के बीच रोज़ादारों ने बेचैनी से काटा माहे रमज़ान का दूसरा रोज़ा

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। भारत मे मार्च के महीने मे भीषण गर्मी ने 121 साल के रिकार्ड को तोड़ते हुए तापमान की उछाल से जहाँ आम शहरवासियों को घरों में कैद कर दिया वहीं रिकार्ड तोड़ गर्मी और उपर से बिजली की आवाजाही ने रोज़ादारों को बेचैन कर दिया।पिछले वर्षों की तरहा रोज़ा इफ्तार के समय भी बिजली की आँख मिचौली जारी रही।दिन भर की उमस और बिजली की कटौती से जूझते हुए तमाम रोज़ादारों ने सदा ए अल्लाहो अकबर की गूँज सुनने के बाद कैण्डिल मे रोज़ा इफ्तार किया।

*शरबत और जूसी फलों को रोज़ेदारों ने दी दस्तरख्वान मे खास अहमियत*

आम तौर पर रोज़ा खोलने मे लोग खजूर को अहमियत देते हैं क्यूँकि इसमे तमाम तरहा के आयरन मिनरल कैल्शियम एमिनोऐसिड फासफोरस और विटामिन की प्रचूर मात्रा जैसे पोशकतत्व पाए जाते है।जिससे जिस्म मे ताक़त देर तक बनी रहती है।वहीं अधिक्तर लोग जो उसूलों के पाबन्द हैं व गरम पानी और नमक से रोज़ा खोलने के बाद ही दस्तरख्वान पर रखी कुछ भी चीज़ अपने मुँह मे डालते हैं।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सै०मो०अस्करी ने बताया की इस वक़्त गर्मी की शिद्दत को देखते हुए चना ,मटर ,दही बड़ा, दही फुल्की ,आलू टिक्की, प्याज़ पनीर पालक और बैगन मे मिक्स बेसन से बनी पकौड़ी ,ब्रेड पकौड़ा जैसी चीज़ो से ज़्यादा फोकस रोज़ेदारों का शरबत और रसदार फलों पर होता है।हर घर मे चाहे दस्तरख्वान पर कुछ हो या न हो लेकिन तरबूज़ का रहना भी आवश्यक है।बाज़ारों मे तरहा तरहा के फ्लेवर मे शरबत मिल रहे हैं रुहअफज़ा खस ऑरेन्ज ज़ाफरान और नीबूं फ्लेवर मे विभिन्न उदपादक कम्पनियों के ब्रांड शरबत बाज़ारों मे छाए हुए हैं।वहीं तरहा तरहा के फलों से भी बाज़ार पटे पड़े हैं।दायरा शाह अजमल मे परचून की दूकान चलाने वाले शाहिद खान का कहना है की अल्लाह ने माहे रमज़ान को रहमत का महीना साबित किया है यही वजहा है की एक ग़रीब से ग़रीब इन्सान भी माहे रमज़ान मे वह सब ग़िज़ा खा लेता है जो आम दिनो मे नसीब नहीं होती।मुम्बई से प्रयागराज आए इरफान हैदर पर रोज़ा क़स्र है वह इस वक़्त सफर मे है लेकिन रोज़ेदारों के लिए इफ्तारी के इन्तेज़ाम करने मे लग कर वह एक रोज़ादार के सवाब के हक़दार बनने का काम कर वह रब की रज़ा हासिल करने की कोशिश कर रहे।इसी तरहा बहोत से ऐसे लोग हैं जिन पर सफर मे रहने के कारण रोज़ा क़स्र करार दिया गया है वह भी रोज़ादारों की खिदमतगुज़ारी मे लग कर बारगाहे माबूदी की खुशनूदी हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

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