गुरु से बड़ा दाता कोई नहीं होता-गिरीशानंद महाराज

जबलपुर।नरसिंह मंदिर में चल रही भागवत कथा में संतों गुरु की महिमा पर प्रकाश डाला।
संत ईश्वर से भी कुछ नहीं मांगते वो जनसामान्य से भी कुछ पाने की लालसा नहीं रखते। साधु संत सदैव आशीर्वाद आशीष के साथ मंगल की कामना करते है। संत सदैव देने का कार्य करते हैं। सनातनी वैदिक ग्रंथ जोडना सीखते है। गुरु और प्रभु ही आनंद स्वरूप है। गुरु-गोविंद के चरणों में आनंद ही आनंद है। सद्गुरु डा श्याम देवाचार्य महाराज ने जबलपुर को वैदिक शिक्षा के विद्यालय, गीता के ज्ञानयोग, देवालय और साथ ही सनातन परापंराओं के ध्वजवाहक बनकर धर्म जागरण किया है। गुरु से बड़ा दाता कोई नहीं होता। जिस पर गुरुकृपा हो जाती है उस साधक का जीवन धन्य हो जाता है। उक्ताशय के उद्गार व्यासपीठ से रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेशप्रपन्नाचार्य महाराज ने व्यक्त किए।
नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में चल रही भागवत कथा में संतों के प्रवचन भी हुए जिसमें स्वामी नरसिंह दास महाराज, स्वामी गिरीशानंद महाराज ने कहा कि पांच ज्ञानेन्द्रिय, पांच कामइंद्रियों और मन कुल 11 को साधना ही एकादशी-व्रत है। आज अधिक से अधिक नाम संकीर्तन करने की आवश्यकता है। धार्मिक वैदिक ग्रंथ और संत समाज मार्गदर्शन करते हैं। संत समागम में स्वामी रंजीतानंद, स्वामी राजारामाचार्य, स्वामी हनुमान दास, स्वामी बालकदास, स्वामी प्रकाशान्द, साध्वी मनीषादास, साध्वी शिरोमणी आदि शामिल हुए। इस अवसर पर सांसद राकेश सिंह, आनंद राव, पं. रोहित दुबे, अशोक मनोध्याय, अंजू भार्गव, दिलीप अग्रवाल, विध्येश भापकर, वीणा तिवारी, शिवकली मालवीय, रामलाल रजक आदि उपस्थित रहे।

