शासनादेशों पर भारी पड़ रहे बाबू
लम्बे समय से जमे हैं एक ही जगह चला रहे अपनी सरकार
अधिकारी भी इनके प्रभाव को नहीं कर पा रहे कम
( कृष्ण कांत पांडेय )
प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार ) । प्रदेश में किसी भी राजनीतिक दल का शासन रहा हो, जिलाधिकारी कार्यालय में विभिन्न पटलों पर तैनात बाबुओं पर कोई असर नहीं पड़ा। वह लम्बे समय
से एक ही जगह तैनात हैं। यह बाबू शासनादेशों पर भी भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। शासन की नीति है कि तीन वर्ष से अधिक समय तक कोई भी बाबू एक पटल पर नहीं रह सकता लेकिन जिलाधिकारी कार्यालय में दशकों से बाबू एक ही जगह जमे हैं और अपनी सरकार चला रहे हैं। हाल ही में प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने बाकायदा शासनादेश जारी करके तीन साल से अधिक समय से एक ही पटल पर कार्यरत कर्मचारियों को अन्यत्र स्थानान्तरित करने का आदेश जारी किया है। उन्होंने यहां तक कहा है कि यह भी सुनिश्चित किया जाय कि स्थानांतरण के बाद संबंधित कार्मिक का पटल पर प्रभाव न बना रहे। सरकारी कार्यालयों में शुचिता बनाए रखने के लिए शासन द्वारा पूर्व में भी आदेश दिए जाते रहे हैं कि समूह ग के कार्मिकों का तीन वर्ष के बाद पटल परिवर्तन या क्षेत्र परिवर्तन किया जाय। इसी क्रम में मुख्य सचिव ने शासनादेश जारी कर कार्मिकों के स्थानांतरण का आदेश दिया है। उनके आदेश का भी अनुपालन नहीं हो रहा। शासन के संज्ञान में आया है कि अभी भी उक्त आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार जिलाधिकारी कैंप कार्यालय में तैनात अखिलेश श्रीवास्तव वर्ष 2007 से यहां तैनात है। हमेशा इनका प्रभाव बना रहा। कभी औपचारिक तो कभी अनौपचारिक रूप से यह कैंप कार्यालय की व्यवस्था संभाल रहे हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति अपर जिलाधिकारी कार्यालय के प्रोटोकॉल विभाग में तैनात अनूप श्रीवास्तव की है। बताया जा रहा है कि इनकी पूरी नौकरी इसी कार्यालय के इर्द-गिर्द सिमटी रही। सरकार किसी की भी रही हो इन्हें किसी ने भी हटाने का प्रयास नहीं किया। प्रोटोकॉल विभाग में कई कार्मिक ऐसे हैं जो लंबे समय से वहां तैनात हैं। इसी प्रकार अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व कार्यालय में आपदा सम्बन्धी काम देख रहे पटल सहायक अंतिम श्रीवास्तव तीन साल से अधिक समय से इस पटल पर जमे हुए हैं। एडीएम नजूल कार्यालय में तीन साल से अधिक समय से तैनात चण्डिका त्रपाठी को जिलाधिकारी के रीडर की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौप दी गयी है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण कार्यालय में अशोक बाबू हों या फिर सुशील बाबू, मनोज श्रीवास्तव या अन्य कर्मचारी,इनकी पूरी नौकरी मेला में ही बीत गयी लेकिन पटल परिवर्तन नहीं किया गया। मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र द्वारा पटल व क्षेत्र परिवर्तन का आदेश दिये जाने के बाद कलेक्ट्रेट और मेला प्राधिकरण में तैनात बाबू में हड़कंप मचा है। मुख्य सचिव ने 13 मई को जारी कि अपने आदेश में कहा है कि तीन साल की समयावधि पूर्ण होने के पश्चात 30 जून तक हर हाल में कार्मिकों का पटल परिवर्तन कर दिया जाय। उन्होंने सभी विभागध्यक्षों, कार्यालयाध्यक्षों से कहा है कि संवेदनशील, लोक व्यवहार के पदों के सम्बन्ध में व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करके सम्बन्धित कार्मिक का क्षेत्र परिर्वतन शीर्ष प्राथमिकता पर किया जाय। यह भी सुनिश्चित किया जाय कि पटल परिवर्तन वे बाद पटल
पर पूर्व में तैनात कार्मिक का प्रभाव न बना रहे या वह अनौपचारिक या औपचारिक रूप से सम्बद्ध होकर पूर्व की तरह वहीं कार्य सम्पादन न
करता रहे। मुख्य सचिव ने निर्देशित किया है कि कार्मिकों के क्षेत्र परिवर्तन के बाद सम्बन्धित कार्यालयाध्यक्ष यह प्रमाण पत्र अपने विभागाध्यक्ष को 30 जून तक भेजेंगे कि उनके अधीन तीन वर्ष से अधिक अवधि का कोई कार्मिक एक ही पटल पर कार्यरत नहीं है। इसी प्रकार विभागाध्यक्ष भी शासन को प्रमाण पत्र देंगे कि उनके अधीन मुख्यालय में 30 जून तक तीन वर्ष से अधिक समय से कार्यरत कार्मिकों का पटल परिवर्तन कर दिया गया है।


