आशाही ईदगाह मस्जिद को सील किए जाने को कोर्ट में दिया प्रार्थना पत्र

इस मामले में अगली सुनवाई एक जुलाई को होगी
वादी पक्ष ने जताई हिन्दू धर्म की चिन्हों को नष्ट किए जाने की आशंका
(अनुराग शुक्ला )
मथुरा (आरएनएस ) ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे और अभी तक सर्वे को लेकर जो बातें सामने आई हैं उसके बाद मथुरा में भी हलचल तेज हो गई है। न्यायालय में शाही ईदगाह मस्जिद को सील किए जाने की मांग को लेकर प्रार्थना पत्र दिया गया है। अधिवक्ता महेन्द्र प्रताप सिंह ने सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में प्रार्थना पत्र दिये जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में अगली तारीख एक जुलाई दी है। वादी पक्ष द्वारा शाही ईदगाह मस्जिद में मौजूद हिन्दू धर्म की निशानियों को हटाये जाने की आशंका जताई गयी है। शाही ईदगाह मस्जिद को सील कर सीआरपीएफ कमाण्ड में रखने की मांग की गई है। वादी पक्ष द्वारा अदालत में कहा गया है कि मस्जिद से हिन्दू धर्म की निशानियां मिटाई जा सकती है। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि शाही ईदगाह (मूल गर्भगृह) को सील करें व परिसर के लिए सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति की जाए। सुरक्षाधिकारी को यह निर्देश दिया जाए कि वह शाही ईदगाह में बने प्राचीन हिन्दू धर्म के चिन्हों को तथा अन्य कलाकृतियों और साक्षों को नष्ट न किया जा सके। वहीं श्रीकृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ भूमि को मुक्त करा कर शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने के लिए एक और दावा कोर्ट में दायर किया गया। जिला जज के अवकाश पर होने के चलते एडीजे आठ की कोर्ट में दावे की सुनवाई हुई। कोर्ट द्वारा इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 25 मई दी गई है। अधिवक्ता शैलेन्द्र सहित 11 लोगों ने इस दावे को दायर किया है। दावे में प्रमुख रूप से कहा गया है कि अलग अलग कोर्ट में दायर किए गए दावों को एक साथ कर सुनवाई की जाए। अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद में मिले सबूतों के बाद हर हिन्दू की आवाज है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि को भी मुक्त कराया जाए। श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए कोर्ट में अब तक 11 दावे दायर किए जा चुके हैं।




