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कला में डूब कर ही दार्शनिक दृष्टिकोण प्रदर्शित कर सकता है कलाकार : जस्टिस सुधीर

 

राज्य ललित कला अकादमी की ओर से आयोजित ग्रीष्मकालीन कार्यशाला के उद्घाटन

मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज में सुबह 9:00 से 11:00 पेंटिंग के हुनर सिखेंगे जूनियर कलाकार

(अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । जैसा है जैसा हो और जैसा होना चाहिए। तमाम दार्शनिक दृष्टिकोण के साथ दर्द और स्नेह को दर्शाने का काम किसी कलाकार के द्वारा कला में उतर कर कला में डूब कर प्रदर्शित किया जा सकता है। जब कलाकार वस्तु या घटना के बारे में विचार करता है। इस तरह हमारे मन-मस्तिष्क में अनेक प्रकार के विचारों का जन्म होता है। यही वास्तविक सृजनात्मकता है। अनेक प्रकार के दार्शनिक विकास का सृजन है। इस तरह कलाकार को आनंद की अनुभूति होती है़। यह बातें राज्य ललित कला अकादमी की ओर से आयोजित 20 दिवसीय ग्रीष्मकालीन कार्यशाला के उद्घाटन के मौके पर मुख्य अतिथि जस्टिस सुधीर नारायण अग्रवाल ने कहीं। शौकत अली रोड स्थित मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज में मुख्य अतिथि ने कैनवास पर चित्र बना कर कार्यशाला की ओपनिंग किया। विशेष अतिथि रहे प्रबंधक फरहान उल्लाह एवं कॉलेज के प्रधानाचार्य ख्वाजा तारिक अहमद ने कला के प्रति अपनी रुचि स्पष्ट करते हुए कहा कि कला के माध्यम से बच्चों में रचनात्मकता का विकास किया जा सकता है। कला के द्वारा बच्चों को मोटिवेट करने पर जोर दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम के संयोजक एवं ललित कला कार्यकारिणी सदस्य रवींद्र कुशवाहा ने सभी मेहमानों का स्वागत एवं शुक्रिया किया। संचालन कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक तलत महमूद ने किया। इस मौके पर पूर्व प्रधानाचार्य भानु प्रसाद तिवारी, असरार गांधी, ललित कला अकादमी सदस्य आशुतोष त्रिपाठी, डा. कावेरी विज, डा. जाहिदा खानम, एनपी श्रीवास्तव, कासिम फारुकी, राजेंद्र भारतीय, जलाल फूलपुरी, सै. इम्तेयाज हुसैन, एडवोकेट प्रदीप मिश्रा, अब्दुर्र रहमान, अकील अब्बास रिजवी, मो. जावेद, सुम्बुल परवीन, बिंते फातमा, शमा बानो, फरहा अब्बास, राना रिजवी, कॉलेज स्टाफ, कलाकार, बड़ी संख्या में प्रतिभागी बच्चे एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।

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