वैदिक परंपरा के निर्वाह गणेश भगवान श्री राम- स्वामी श्री महेश आश्रम जी

(अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। श्री नागेश्वर महादेव मंदिर श्री दंडी स्वामी आश्रम अरेल प्रयागराज में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस की कथा करते हुए श्रीमद जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री महेश आश्रम जी महाराज ने बताया कि बालक श्री राम के साहित्य चारों भाइयों का याद संस्कार के उपरांत गुरु वशिष्ठ के द्वारा वैदिक शिक्षा एवं भगवान श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने में अत्यधिक सार्थकता हुआ इसलिए प्रत्येक गृहस्थ को अपने बालकों को गुरुजनों से जीवन जीने का शिक्षा दिलाने का प्रयत्न करना चाहिए क्योंकि यम नियम संयम के द्वारा मन को अनुशासित कर माता-पिता एवं गुरुजनों का आदर करने वाला बालक कभी भी अधर्म मार्गी नहीं हो सकता जहां भगवान श्रीराम प्रातः काल सुषुप्ति से उठने के बाद माता पिता एवं गुरुजनों को प्रणाम करते हैं वही सरयू के तट पर अपने भाई भरत लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न के साथ संध्या अधिक वैदिक क्रियाओं के उपरांत समाज के सभी श्रेष्ठ जनों के प्रति आदर एवं अनुजओं के प्रति प्रेम का भाव रखते हुए सबके मन के मोहक बनकर पूरे अयोध्या वासियों को अपने बाल लीलाओं के द्वारा सभी को आनंद प्रदान करते हैं गुरुकुल में विद्या अध्ययन करके मनुष्यता का प्रमाण स्थापित करने के साथ-साथ पिता का आज्ञा का पालन करते हुए महात्मा विश्वामित्र के साथ संतों की सेवा के लिए प्रस्थान करते हैं भगवान श्री राम के सरलता संयम एवं सरवानी के लिए संभव हैं उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के रूप में स्थापित करता है इसलिए हम सभी अपने भी बालकों में श्री राम की छवि देखना चाहते हैं तो अपने बालकों को वैदिक शिक्षा दीक्षा दिलाने का प्रयत्न करना चाहिए । कथा में उपस्थित श्री दंडी स्वामी रामाश्रम जी डॉ चंद्र देव जी महाराज खाई बाबा जी अनेक दंडी संन्यासी संत महात्मा, एवं आनंद तिवारी जी अतुल शुक्ला आचार्य ज्ञानेश्वर धनंजय स्वरूप ब्रह्मचारी दिनेश कुमार मिश्र शारदा मिश्र बलवीर तोमर परमेश्वर मिश्र जय गोपाल वक्त कुरुक्षेत्र आचार्य ज्ञानेश लवलेश शुक्ला आदि सैकड़ों की संख्या में भक्तों ने कथा का आनंद लिया।




