गुरु परम्परा से ही बहती है सनातन धर्म की अविरल धारा : शंकराचार्य वासुदेवानंद

(विनय मिश्रा ) प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। अलोपीबाग स्थित ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य आश्रम में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित गुरु पूजन कार्यक्रम में ज्योतिषपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने भक्तों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में गुरु को साक्षात ब्रह्म माना गया है। गुरु परम्परा से ही सनातन धर्म की अविरल धारा बहती है।
शंकराचार्य ने कहा कि ज्ञान शक्ति के सही आकलन के लिए सनातन धर्म में शास्त्रार्थ की अति प्राचीन परम्परा है। हिंसा व अभद्रता का कोई भी स्थान सनातन धर्म में नहीं है। धर्म शक्ति न्याय शक्ति एवं राष्ट्र शक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। इस अवसर पर शंकराचार्य वासुदेवानंद ने भगवान आदि शंकराचार्य ब्रह्मलीन ज्योतिषपीठाधीश्वर ब्रह्मानंद जी महाराज, ब्रह्मलीन ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी शांतानंद जी महाराज, ब्रह्मलीन ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी विष्णुदेवानंद जी महाराज, राधा मोहन एवं श्री यंत्र की पूजा आरती किया। इसके बाद हजारों भक्तों ने गुरु पादुका का दर्शन पूजन किया और सैकड़ों भक्तों ने शंकराचार्य जी से गुरु मंत्र (दीक्षा) प्राप्त किया। ज्योतिष्पीठ के प्रवक्ता ओंकार नाथ त्रिपाठी ने बताया कि अनुष्ठान में दंडी संन्यासी स्वामी विनोदानंद, पं. शिवार्चन उपाध्याय, शास्त्रीजी, आचार्य छोटे लाल, ब्रह्मचारी आत्मानंद, ब्रह्मचारी जीतेंद्रानंद, आचार्य पंडित विपिन शास्त्री, आचार्य पंडित मनीष मिश्रा, पंडित राहुल, पंडित सत्य प्रकाश, आकाश एवं शिवम ने पूजा-पाठ कार्य सम्पन्न कराया। इस दौरान प्रमुख रूप से दंडी संन्यासी जितेंद्रानंद, पं. दयाशंकर पांडेय, वरिष्ठ अधिवक्ता लखनऊ अशोक कनकने कटनी, सीताराम शर्मा जयपुर, लीला शर्मा पंजाब, अरुण गोयल लुधियाना, अन्नू तिवारी मध्य प्रदेश, आर सिंह, राजेश राय दिल्ली एवं जगदीश मिश्रा आदि विभिन्न प्रांतों से आए भक्त शामिल हुए।


