हुसैन का नाम ज़िन्दाबाद था-है और पाएन्दाबाद रहेगा – मुफ्ती मोहम्मद फय्याज़

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। करैली के डी ब्लाक मे यादे हसन यादे हुसैन कॉन्फ्रेंस मे हज़रत इमाम हुसैन की शहादत का बयान किया गया।
शहादत के बयान कमेटी डी ब्लाक करैली के आलिम रज़ा ,दाऊद रज़ा ,यासीन रज़ा ,मो०जमशेद ,शान खान ,जौन जैदी की ओर से आयोजित नवासा ए रसूल हज़रत इमाम आलिमक़ाम की शहादत की याद मे हुए जलसे मे हज़रत क़ारी मुफ्ती मोहम्मद फय्याज़ साहब ने करबला के बलीदानी इमाम हुसैन की शख्सियत पर कहा हुसैन ज़िन्दाबाद था है और रहती दुनिया तक क़ायम और दायम रहेगा।
आज हुसैन के नाम के लोग तो मिल जाएँगे लेकिन यज़ीद का नाम लेवा कोई नहीं है।हुसैन आलिमक़ाम जंगे करबला मे शहीद हो कर भी जीत गए और यज़ीद जीत कर भी हार गया।कारी व नातख्वानों ने हज़रत हसन व हुसैन के साथ हज़रत अली की शान मे भी नातिया कलाम पेश किया।हाजी मोहम्मद नफीस ,असग़र रज़ा ,इज़हार रज़ा ने देर रात तक चली हुसैनी कान्फ्रेंस मे एक से बढ़ कर एक नातिया कलाम पढ़ कर खेराजे अक़ीदत पेश की।
- शहीदाने करबला कमेटी ने रानीमण्डी से निकाला बहत्तर ताबूत का जुलूस
- एक एक कर निकाले गए शोहदा के ताबूत
- बूंदा बांदी के बावजूद अक़ीदतमन्दों ने बड़ी संख्या मे की शिरकत
रानीमण्डी हाता छम्मन खाँ से शहीदाने करबला कमेटी की ओर से देर रात निकाला गया बहत्तर ताबूत का जुलूस।नजीब इलाहाबादी के संचालन मे ज़ाकिरे अहलेबैत हसन अली ने मजलिस को खेताब किया तो जौनपुर के मौलाना क़ैसर साहब ने एक एक शहीदों की नक़ाबत के फराएज़ अन्जाम दिए सभी बहत्तर शहीदों का सिलसिलेवार तार्रुफ कराते हुए ताबूत निकलता रहा आखिर में जनाबे हुर ,औन व मोहम्मद ,हज़रत क़ासिम ,जनाबे अली अकबर का ताबूत सफेद चादर पर खून के छींटो और फूलों से सजा कर निकाला गया।हज़रत अब्बास का विशाल अलम के फरैरे को फहला कर अक़ीदतमन्दों के बीच ज़ियारत को लाया गया।झूला नन्हे अली असग़र का भी साथ साथ निकला।सबसे अन्त मे हज़रत इमाम हुसैन का ताबूत सभी लाईटों को बुझा कर मोमबत्ती की रौशनी व लोबान की धूनी के साथ निकाला गया तो अक़ीदतमन्दों मे जहाँ बोसा लेने और ज़ियारत को होड़ मच गई वहीं मोमनीन ने मातम भी किया।अरशद अली इब्ने नज़ीर हुसैन अखलाक़ हुसैन इब्ने जब्बार हुसैन जो बहत्तर ताबूत को क़ायम किए थे उनकी मग़फिरत की दूआ भी कराई गई।एक एक ताबूत सिलसिलेवार छम्मान खाँ के हाँते से निकाल कर मीर हुसैनी के अज़ाखाने पर ले जाया गया।लोग इमाम हुसैन के ताबूत के आगे आगे नौहा और मातम की सदाएँ बुलन्द करते हुए शामिल हुए।वहीं दरियाबाद मे इमामबाड़ा अहमद अली ज़ैदी मे मौलाना उरूज अब्बास साहब क़िबला ने मजलिस को खेताब किया और हज़रत इमाम हुसैन की शहादत और बेटी सकीना पर ढाए गए ज़ुलमो सितम का तज़केरा किया।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के नौहाख्वानों ने पुरदर्द नौहा पढ़ा तो अन्जुमन के मातमी सदस्यों ने सीनज़नी की।मजलिस मे आफताब हैदर ,सैय्यद मोहम्मद अस्करी ,सैय्यद मोहम्मद मेंहदी ,पार्षद फसाहत हुसैन ,डॉ रज़ा हैदर ,शाहरुक़ हुसैनी ,अरशद ज़ैदी आदि शामिल रहे।
इमाम रज़ा की शहादत पर ब्रहस्पतिवार को रानीमण्डी इमामबाड़ा साजिद अली से निकलेगा जुलूस
इसलामिक माह सफर उल मुज़फ्फर की 17 ब्रहस्पतिवार को रानीमण्डी बच्चा जी धरमशाला स्थित इमामबाड़ा साजिद अली से रात्रि 8 बजे शहादत इमाम रज़ा पर जुलूस निकाला जाएगा।बुज़ुर्ग मर्सियाख्वान ज़ायर हुसैन द्वारा क़ायम 69 साल पुराने जुलूस मे रज़ा अब्बास ज़ैदी मजलिस को खेताब करेंगे।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया नौहा और मातम का नज़राना पेश करते हुए जुलूस को यादगार हुसैनी लेन स्थित इमामबाड़ा मे अलवेदाई नौहा पढ़ते हुए सम्पन्न कराएगी।जुलूस मे ताबूत अलम व ज़ुलजनाह की शबीह भी रहेगी।ज़ायर हुसैन ,काज़िम अब्बास ,अहमद अब्बास कज्जन ,ज़रग़ाम हैदर ,बाक़िर अब्बास जुलूस मे मर्सिया पढ़ेंगे।




