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Pryagraj Shrimadbhagwat Naribari: मनुष्य का जीवन बंशी की तरह है, जिसमे दुखों के कई छिद्र हैं-अभिषेक हरिकिंकर

नारीबारी मे श्रीमद्भागवत के पांचवें दिन गोवर्धन पर्वत व श्री कृष्ण की मोर पंख नृत्य आकार्षन का केंद्र रहा

Pryagraj Shrimadbhagwat Naribari: मनुष्य का जीवन बंशी की तरह है, जिसमे दुखों के कई छिद्र हैं-अभिषेक हरिकिंकर  दुःख के बाद ही सुख की सच्ची अनूभूति होती है। मनुष्य का जीवन बंशी की तरह है, जिसमे दुखों के कई छेद हैं। लेकिन इसी छिद्रों के सहयोग से मधुर मोहिनी स्वर गुंजायमान होते हुए आनंददायक संगीत मे परिवर्तित होता है।

भगवान के समर्पण भाव से दुखों से मुक्ति मिलती है। श्री कृष्ण भगवान ने गोपियों के वस्त्र लेकर उन्हें सीख दिया की कभी भी निर्वस्त्र होकर स्नान नही करेंगे। गोकुल धाम, वृन्दावन, बरसाने के कण कण में आज भी नटवर नागर का निवास है।

ग्वाल बाल और गोपियों के भाव के वशीभूत श्रीकृष्ण ने वहां बाल लीला किया। उक्त बातें नारीबारी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य पंडित अभिषेक कृष्णम् हरिकिंकर जी महाराज ने बुधवार को पांचवे दिन बकासुर और अघासुर वध के कथा के साथ ग्वाल-बाल के गैया चराने से लेकर,वस्त्र हरण, गोवर्धन पूजा आदि कथा कही। श्री हरिकिंकर जी ने आगे बताया कि जब ब्रह्मा जी ने भगवान की परीक्षा लेने के लिए सभी ग्वाल बाल और गाय बछड़े सब का हरण कर लिया।

तब भगवान ने सब का उसी रूप में स्वरूप धारण कर लिया। सारे ब्रज में सब के घर अपना स्वरूप भेज दिया। ब्रह्मा जी यह लीला देख कर मान लिया कि यही परम ब्रह्म है। जो अपने घर का माखन मिश्री छोड़कर भक्त ब्रजमंगल जी के घर नमक का लड्डू भी भाव से ग्रहण करते हैं।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से विजय बिहारी श्रीवास्तव,फूल कुमारी श्रीवास्तव, विजय नारायण शुक्ल,सूर्यकान्त शुक्ल, कृष्ण भास्कर चतुर्वेदी, दिलीप कुमार चतुर्वेदी, सुरेन्द्र शुक्ल, बैजनाथ केसरवानी आचार्य राजीव तिवारी आशुतोष, इन्द्रमणि चतुर्वेदी आदि सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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