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इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर जीशान था सक्रिय

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए करेली निवासी संदिग्ध आतंकी मोहम्मद जीशान कमर के संपर्क में एक हिस्ट्रीशीटर समेत कई शख्स थे। वह उनके साथ अक्सर घूमने जाया करता था। नैनी स्थित फार्म हाउस में पार्टी होती थी। इसमें अपने साथियों से कहता था कि वह कुछ बड़ा काम करेगा। करीबी उसके बदलते व्यवहार को देखने के बाद कुछ समझ नहीं पा रहे थे। ऐसी ही कुछ जानकारी खुफिया एजेंसी के हाथ लगी है। अब उसके संपर्क में रहने वालों का ब्योरा खंगाला जा रहा है, ताकि उनकी गतिविधियों की संलिप्तता का पता चल सके।
वही घर के इकलौते बेटे जीशान ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद नैनी स्थित सैम हिग्गिनबाटम यूनिर्विसटी आफ एग्रीकल्चर, साइंस एंड टेक्नोलाजी (शुआट्स) से एमबीए की उपाधि ली। तब उसके पिता सऊदी अरब में नौकरी कर रहे थे, वह भी उनके पास चला गया। कोरोना की पहली लहर के दौरान वापस प्रयागराज आया था। पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इसी साल अप्रैल में जीशान पहले लखनऊ गया था, जहां उसकी मुलाकात एक शख्स से हुई थी। फिर उसे हथियारों को चलाने की ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजा गया था। वहां से लौटकर वह आतंकी गतिविधियों के लिए नेटवर्क बनाने लगा। इसी दौरान उसके संपर्क में हिस्ट्रीशीटर समेत कई युवक आए। सूत्रों का दावा है कि इंटरनेट मीडिया के उन प्लेटफार्म पर जिन पर जीशान सक्रिय था, उसकी जांच से पता चला है कि वर्ग विशेष के कुछ युवक उसके विचारों का समर्थन करते थे।

हथियारों को चलाने की ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजा गया था

एमबीए किया, सऊदी गया और फिर आंतकी कनेक्शन में

उसके लैपटाप, पेन ड्राइव, डायरी और दूसरे इलेक्ट्रानिक उपकरण को भी दिल्ली ले जाया गया है। अनुमान है कि इससे स्लीपर माड्यूल के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। पुलिस अधिकारियों को दिल्ली से जानकारी मिलने का बेसब्री से इंतजार है, ताकि अगली कार्रवाई की जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब आठ माह पहले करेली निवासी शाहरुख ने यहां पोल्ट्री फार्म खोला था। वहां देशी मुर्गा पाला जाता था। पोल्ट्री फार्म अक्सर तीन-चार युवकों को आते-जाते देखा जाता था। कभी-कभी कुछ लग्जरी कार से भी युवक आते थे। उनकी गतिविधियां संदिग्ध रहती थी, लेकिन कोई उनसे पूछताछ करने की हिम्मत नहीं करता था। सूत्रों का कहना है कि कभी कभार पोल्ट्री फार्म के भीतर से पटाखे जैसी आवाज भी सुनने को मिलती थी। वहां काम करने वाले लोग खड़ा मुर्गा ही बेचते थे।

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