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सरकार के स्वामित्व वाले रक्षा उद्योग पहले की तर्ज पर मेक इन इंडिया की तरह आत्म निर्भर बनाया जाए

प्रयागराज। आज हिंद मजदूर सभा के नेता योगेश चंद्र यादव ने कहा कि किसी भी किसी भी देश की देश की सुरक्षा बहुत ही महत्वपूर्ण विषय होती है और इसके लिए विश्व के सभी देशों की अपनी अपनी एक रक्षा नीति तथा सशक्त सेनाएं होती हैं।

भारत के पास विश्व की तीसरे नंबर की सबसे बड़ी सेना मौजूद है देश की थल सेना वायु सेना तथा नौसेना देश की सुरक्षा करने में सभी सभी सक्षम होगी जब व स्टेट आफ आर्ट वाले साधु समाज से पूर्ण रूप से सुसज्जित होगी रक्षा क्षेत्र के मामले में भारत का विष पूरे विश्व में पांचवा स्थान है तथा 2015 में भारत का रक्षा खर्च जीडीपी का 2.4 038 प्रतिशत था तथा तकनीकी जतिन अत्यधिक खर्चीली होती है।

अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त होने के बाद भारत में रक्षा तैयारियों के लिए पूर्ण अपनी भरता हासिल करने की दिशा में गंभीरतापूर्वक विचार किया था इस दिशा में सन उन्नीस सौ 48 में देश की पहली औद्योगिक नीति के प्रस्ताव को स्वीकार किया गया इससे उद्योगों के विकास में सरकार की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया था।

उक्त प्रस्ताव में सन 1965 में परिवर्तन किया गया तथा सामरिक तथा प्रमुख उद्योग जैसे हथियार गोला-बारूद रेलवे यातायात आणविक ऊर्जा इत्यादि को सार्वजनिक क्षेत्र सरकार के नियंत्रण में रखने का प्रावधान करते हुए सरकार को उनकी विकास के लिए उत्तरदाई बनाया गया था इसकी स्थापना के 50 वर्ष से ज्यादा की ज्यादा के समय से रक्षा अनुसंधान विकास संस्थान सेनाओं के लिए आवश्यक एवं अत्याधुनिक उपकरणों को विकसित करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है।

मिसाइल तकनीक इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में कई देशों की तुलना में पायदान पर है देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने जीवन की आईडी देने वाले जवानों की शहादत की केवल गर्व करने की योग्य नहीं है आयुध निर्माणी में कार्य से ज्यादा कर्मचारियों ने पिछले 5 दशकों की अवधि में निर्माण में खतरनाक अत्यधिक जोखिम वाले उपकरणों का उत्पादन करते समय हुई विभिन्न दुर्घटनाओं में अपना जीवन बलिदान कर दिया है यह प्रमाणित है कि देश की आजादी के बाद सभी एक कारगिल युद्ध सहित जितने भी युद्ध हुए हैं उन सभी में आर्यों ने हथियारों में भूमिका निर्वाह किया है।

अलमारी बोर्ड के अधीन देश की 41 आयुध निर्माणों के द्वारा बनाए जा रहे सभी उत्पाद वास्तव में मेक इन इंडिया ही हैं क्योंकि आयुध निर्माणी यों के 90 प्रश्न के 90% उत्पाद स्वदेशी हैं इसलिए रक्षा उद्योग के क्षेत्र में मेक इन इंडिया के नाम पर ही निजी कंपनियां कारपोरेट घरानों और वैश्विक देशों के उद्योगपतियों के ऊपर असीम कृपा की बारिश कर रही है।

मौजूदा भारत सरकार की कृपा दृष्टि का कारण सरकार से ही बेहतर जानना होगा तीन दशकों से के पूर्व इन देशों के पूर्व आयुध निर्माणी के पास दो लाख से ज्यादा मानव शक्ति थी आज या घट कर 88 हजार ही रह गई है पिछले तीन दशक में आउटसोर्सिंग तकनीक वाले उत्पाद वाले नागपुर के नाम पर लगातार मानव शक्ति में कमी की जा रही है।

यही कैसा ऐसी सरकार के कार्यकाल में हो रहा है जो सरकार इस बात का दावा कर रही है नए-नए रोजगार ओं के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और जो वैश्विक देशों में से लेकर हमारे भारत में भी मजबूती से कदम बढ़ा रहा है जिसमें सरकार करती है।

भारत के आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया जाए और क्या सरकार कहने में विश्वास रखती है या अपने आईने को आत्मिक भर के नाम पर उद्योगों को उद्योगों को दक्षा उद्योगों को तराजू में तौल कर निजीकरण का भी सपना दिखाने का प्रयास कर रही है यह मैं आपको और सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए सभी भारत आत्मनिर्भर बन पाएगा।

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