ट्रेड यूनियन नेताओं के विरूद्ध हुई एफ.आई.आर. की मिशन ऑफ जस्टिस’ ने की निन्दा
प्रयागराज । ‘मिशन ऑफ जस्टिस की ऑनलाइन हुई मीटिंग में संगठन से जुड़े अधिवक्ताओं ने 22 मई को प्रवासी मजदूरों के समर्थन और श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर उपश्रमायुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपने पर श्रमिक नेताओं पर एफ़ आई आर दर्ज करने को अलोकतांत्रिक और अन्यायजनक बताया। अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से कहा कि ए आई यू टी यू सी के कार्यकर्ता और अधिवक्ता राजवेन्द्र सिंह सहित विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं, श्रमिक नेताओं पर एफ़ आई आर दर्ज करना करना कानून का दुरुपयोग है।
और इसे तुरन्त रद्द किया जाना चाहिए। सरकार के श्रमिक विरोधी निर्णयों एवं वर्तमान में कोविड 19 जैसी महामारी मे प्रवासी श्रमिकों के साथ प्रशासन के अमानवीय व्यवहार के कारण उत्पन्न हुए जनाक्रोश से शासन को अवगत कराने एवं सरकार की कार्यशैली में गुणात्मक सुधार लाने हेतु उपरोक्त तारीख को शान्तिपूर्ण एवं संवैधानिक दायरे में रहते हुए ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन जिला प्रशासन इनकी मांगो पर विचार करने की जगह उल्टे श्रमिक नेताओं पर ही एफआईआर दर्ज कर दिया।
जो उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन और अलोकतांत्रिक है। अतः ए.आई.यू.टी.यू.सी. के कार्यकर्ता व अधिवक्ता राजवेन्द्र सिंह सहित अन्य ट्रेड यूनियन नेताओं के विरुद्ध एफआईआर तुरंत रद्द की जाय।
एफ़ आई आर रद्द न करने पर श्रमिक नेताओं की ओर से उनके मुकदमों में मिशन ऑफ जस्टिस ने श्रमिक नेताओं की ओर से पैरवी करते हुए निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने का फैसला किया।ऑन लाइन बैठक में प्रमोद कुमार गुप्ता, घनश्याम मौर्य, मो.सईद, बुद्ध प्रकाश, मोहम्मद इमरान, गुफरान अहमद, सत्यदेव शर्मा, राकेश यादव आदि अधिवक्तागण शामिल रहे।



