
(संजय शुक्ला )भोपाल ( अनुराग दर्शन समाचार )। लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस ने एक बार फिर बड़े शहरों में कम स्थानों पर ही सही पर वापसी की है। कांग्रेस 23 साल से पार्टी नगर निगमों के चुनावों में जीत के लिए संघर्ष करती रही पर उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली। यही वजह है कि कांग्रेस अब पाँच नगर निगमों में अपनी विजय पर उत्सव मना रही है। 23 साल पहले 1999 में हुए नगरीय निकाय के चुनाव में कांग्रेस मात्र दो सीटों पर ही विजय हासिल कर पाई थी। यह तब हुआ था जब प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार थी और दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री हुआ करते थे। इसमें एक सीट राजधानी भोपाल की थी जब विभा पटेल ने भाजपा की राजो मालवीय को हराया था। इसके अलावा जबलपुर में भी उसे जीत मिली थी। इसके बाद 2004 में हुए मेयर के सीधे चुनाव में भी कांग्रेस का ग्राफ पहले जैसा ही रहा और दो सीटों पर ही उसे संतोष करना पड़ा, तब भोपाल और देवास में उसके प्रत्याशी विजय हुइ थे। इसके बाद 2009 में हुए नगरीय निकाय चुनाव में उसने तीन सीटों देवास, कटनी और उज्जैन में जीत हासिल की थी। इसके बाद आठ साल पहले 2014 में हुए नगरीय निकाय के चुनाव में वह सोलह में से एक भी निकाय चुनाव में वह जीत दर्ज नहीं कर पाई और भाजपा ने सभी स्थानों पर क्लीन स्वीप किया पर इस बार हुए नगरीय निकाय चुनाव में वह पाँच स्थानों पर अपने मेयर प्रत्याशी जिताने में सफल हो रही है।




