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खुले आसमां के नीचे जीने को मजबूर, जिलाधिकारी से की यह शिकायत

करछना, पृयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। करछना तहसील के बरौली गांव निवासी रामसजीवन यादव पुत्र कन्धई लाल बरौली गांव में ही अपना घर बनाकर पिछले 22 वर्षों से सपरिवार निवास कर रहे हैं।
उक्त भूमि से सम्बंधित एक विवाद धारा 209 जमींदारी विन्यास व भूमि व्यवस्था अधिनियम के अन्तर्गत उपजिलाधिकारी करछना के यहां चल रहा था जिसमे दिनांक 13/02/2014 को एकपक्षी आदेश रामसजीवन के विरुद्ध पारित हुआ।
उक्त आदेश में रामसजीवन को बेदखल करने के लिए Execution (निष्पादन)दाखिल नहीं हुआ और न ही उसका कोई आदेश पारित हुआ,जबकि बेदख़ली के आदेश का न्यायालय द्वारा निष्पादन प्रकृया से ही बेदख़ल करना होगा ।
विपक्षी निधि मिश्रा पत्नी बालकृष्ण मिश्रा निवासिनी 55/44 चक जीरो रोड,प्रयागराज ने याचिका संख्या – (सी) 9504/2020 निधि मिश्रा बनाम स्टेट आफ यूपी दाखिल किया जिसमें 16/06/2020 को न्यायालय स्टैन्डिंग काउंसिल से इंस्ट्रक्सन और दिनांक 09/07/2020 तिथि नियत की गई।
आपको बता दें कि दिनांक 08/07/2020 को करछना उपजिलाधिकारी आकांक्षा राना,आशुतोष त्रिपाठी क्षेत्राधिकारी करछना,तहसीलदार करछना देवेन्द्र प्रताप सिंह,कानून गो करछना सत्येंद्र कुमार मिश्रा,लेखपाल बृजेश कुमार पटेल व थानाध्यक्ष घूरपुर अनुराग शर्मा पुलिस बल व जे.सी.बी. लेकर एकाएक रामसजीवन के रिहायशी मकान को गिरवा दिये। पूछने पर उन्होने कहा कि उच्च न्यायालय का आदेश है,और बरसात के समय में रामसजीवन का घर सहित 25 लाख रु. की सम्पत्ति का नुकसान कर दिया।
रामसजीवन के एक मात्र यही घर निवास के लिए था,अब बेघर होकर उसका परिवार दर दर भटक रहा है,उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है ।
रामसजीवन ने न्यायालय में पता किया तो पता चला कि उक्त याचिका में उच्च न्यायालय ने मात्र वस्तुस्थिति की जानकारी के लिए इंस्ट्रक्सन मांगा था किंतु उक्त आदेश की आड़ में रामसजीवन को 25 लाख रुपये की छति पहुंचाई गई।
इस सम्बन्ध में राम सजीवन के प्रार्थना पत्र के साथ सत्यनिष्ठ जन सेवक पार्टी के ज़िला अध्यक्ष अंकुर मिश्रा ने ज़िलाधिकारी को प्रकरण की जाँच कराकर,प्रार्थी को न्याय दिलाने का अनुरोध किया है। इस प्रकरण को लेकर जनता में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर तरह तरह की चर्चा हो रही है।इस सम्बन्ध में उपजिलाधिकारी करछना व क्षेत्राधिकारी से सम्पर्क टेलीफोन पर करने पर सम्पर्क नहीं हो पाया

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