जैन अनुयायियों ने जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए मांगी क्षमा

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज पयुर्षण महापर्व के समापन पर जीरो रोड जैन मंदिर में
कोरोना संक्रमण के चलते क्षमावाणी पर्व सादगी से मनाया गया। प्रातः 8 बजे भगवान का अभिषेक एवं मंत्रोच्चार के साथ सर्वप्रथम शांतिधारा दीपक जैन, आनंदप्रकाश जैन, वीरेंद्र गोयल, अशोक एवं संजय जैन के परिवार की ओर से की गयी। सर्वप्रथम भगवान की महाआरती श्रीमती संतोष जैन परिवार की ओर से की गई। इसके पश्चात लोगों ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए एक दूसरे से दूर खड़े होकर हाथ जोड़कर क्षमा याचना की। जैन धर्म की पंरपरा के अनुसार पर्युषण पर्व के अंतिम दिन क्षमावाणी दिवस पर सभी एक-दूसरे से क्षमा मांगते हैं। क्षमा अहिंसा और मैत्री का पर्व है। क्षमा से हृदय में शांति और मैत्री भाव उत्पन्न होता है। मन की शुद्धि से व्यक्ति का भय दूर हो जाता है। तीर्थंकर ऋषभदेव तपस्थली अंदावा में विराजमान आचार्य विपुल सागर ने बताया कि क्षमावाणी के दिन क्षमा मांग कर जहां हम अपनी विनम्रता एवं ज्ञान को दर्शाते हैं वहीं क्षमा करने वाला अपने उदार हृदय का परिचय देता है। क्षमा एक ऐसा सौदा है जिसमें दोनों पक्ष सौ फीसद लाभ में रहते हैं। इसके विपरीत अहितकर क्रोध है, जो बोध और विवेक का हरण कर दोनों पक्षों को हानि पहुंचाता है। क्रोध के मूल में अहं रहता है अहं के मूल में अज्ञान रहता है। हम भी पारिवारिक सामाजिक जीवन में जब-जब क्रोध के शिकार बनेंगे तब तक क्रोध के मूल में अज्ञान ही होगा। इसलिए समय रहते अहं के वहम का निराकरण करना चाहिए। हम सबको भी उदार हृदय से, अपने प्रति भूल करने वाले को, क्षमा करें। क्योंकि भूलें सबसे होती है पर क्षमा करने की उदारता सब में नहीं होती। यह जिनमें होती है वह महान होते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते लोगो ने इस बार घरो पर रहकर ही दूरदराज बैठे मित्रो एवं सम्बन्धियो से ऑनलाइन वीडियो संदेश भेजकर एक दूसरे से क्षमा मांगी।



