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कर्मचारियों की छंटनी और किसानों की किसानी छीन रही हैं सरकार-रेवती रमण

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)।राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार लोकतंत्र के साथ मजाक कर रही हैं राज्यसभा में बहुमत ना होते हुए भी तानाशाही रवैया से जन विरोधी, किसान विरोधी बिल को पास करा रही हैं जो लोकतंत्र की हत्या हैं । उन्होंने कहा कि सामान्य भाषा में कृषि बिल को समझा जाय तो यह पूंजीपतियों को मदद के आलावा और कुछ नहीं है जैसे किसानों की उपज सिर्फ सरकारी मंडियों में ही नहीं बिकेगी, उसे बड़े व्यापारी भी खरीद सकेंगे। आखिर ऐसा कब था कि किसानों की फसल को व्यापारी नहीं खरीद सकते थे। देश में तो अभी भी बमुश्किल 9 से 10 फीसदी फसल ही सरकारी मंडियों में बिकती है। बाकी व्यापारी ही खरीदते हैं।उन्होंने कहा कि फसल की खुली खरीद से किसानों को उचित कीमत मिलेगी? हर कोई किसान की फसल खरीद सकता है, राज्य के बाहर ले जा सकता है। आप ऐसा किसानों के हित में कर रहे हैं। कर लीजिये। मगर एक शर्त जोड़ दीजिये, कोई भी व्यापारी किसानों की फसल सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत में नहीं खरीद सकेगा।
उन्होंने कहा कि कांट्रेक्ट फार्मिंग जिस पर उतनी चर्चा नहीं हो रही है। इसमें कोई भी कार्पोरेट किसानों से कांट्रेक्ट करके खेती कर पायेगा। यह वैसा ही होगा जैसा आजादी से पहले ईस्ट इंडिया कम्पनी ने बिहार और बंगाल के इलाके में करते थे।मतलब यह कि कोई कार्पोरेट आयेगा और मेरी जमीन लीज पर लेकर खेती करने लगेगा। इससे मेरा थोड़ा फायदा हो सकता है। मगर मेरे गाँव के उन गरीब किसानों का सीधा नुकसान होगा जो आज छोटी पूंजी लगाकर मेरे जैसे प्रवासी किसानों की जमीन लीज पर लेते हैं और खेती करते हैं। ऐसे लोगों में ज्यादातर भूमिहीन होते हैं और दलित, अति पिछड़ी जाति के होते हैं। वे एक झटके में बेगार हो जायेंगे।
उन्होंने कहा कि कार्पोरेट के खेती में उतरने से खेती बड़ी पूंजी, बड़ी मशीन के धन्धे में बदल जायेगी। मजदूरों की जरूरत कम हो जायेगी। गाँव में जो भूमिहीन होगा या सीमान्त किसान होगा, वह बदहाल हो जायेगा। उसके पास पलायन करने के सिवा कोई रास्ता नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि एसेंशियल कमोडिटी बिल में सरकार अब यह बदलाव लाने जा रही है कि किसी भी अनाज को आवश्यक उत्पाद नहीं माना जायेगा। जमाखोरी अब गैर कानूनी नहीं रहेगी। मतलब कारोबारी अपने हिसाब से खाद्यान्न और दूसरे उत्पादों का भंडार कर सकेंगे और दाम अधिक होने पर उसे बेच सकेंगे। हमने देखा है कि हर साल इसी वजह से दाल, आलू और प्याज की कीमतें अनियंत्रित होती हैं। अब यह सामान्य बात हो जायेगी। झेलने के लिए तैयार रहिये।
कुल मिलाकर ये तीनों बिल बड़े कारोबरियों,उधोगपतियों के हित में हैं किसानों को इस क्षेत्र से खदेड़ने की तैयारी है। क्योंकि इस डूबती अर्थव्यवस्था में खेती ही एकमात्र ऐसा सेक्टर है जो लाभ में है। इस बिल से किसानी के पेशे से छोटे और मझोले किसानों और खेतिहर मजदूरों की विदाई तय मानिये।
सांसद ने श्रम बिल की निंदा करते हुए कहा कि 300 तक कर्मचारियों वाली संस्था छंटनी करने के लिए किसी सरकारी परमिशन की जरूरत नहीं होने से मजदूरों के मौलिक अधिकार का हनन हैं इस बिल मे और नियोक्ता द्वारा उनका शोषण होगा इस बिल के सहारे।मोदी सरकार का तानाशाही रवैया देश को किस दिशा में ले जा रहा है यह जनता की समझ से परे हैं ।

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