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राम को 14 वर्ष का वनवास ओर भरत को राज गद्दी जिसे सुन कर दशरथ अचेत

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। श्री कटरा राम लीला कमेटी प्रयागराज के विशाल मंच पर पर चल रही समपुर्ण रामायण की राम कथा में श्री रामायण जी की आरती सुधीर कुमार गुप्ता कककु गोपाल बाबु जायसवाल अश्वनी केसरवानी महेश चन्द्र गुप्ता ने किया तत्पश्चात् निर्देशक सुबोध सिंह ने श्री राम के परमभक्त श्री हनुमान जी की स्तुति करने के बाद राम कथा प्रारम्भ हुई
मंथरा रानी केकयी के कक्ष में आतीहै ओर श्री राम को अयोध्या का राजा बनाये जाने की बात बताती महारानी केकयी ने कहा राम में राजा बनने के सभी गुण है ठीक हि तो है…….
परन्तु मंथरा केकयी को भृमित करते हुए याद दिलाती है दुशमन देश से लड़ते हुए महाराज दशरथ बुरी तरह जख्मी हुए ओर आपने उनकी देखभाल करते हुए प्राण बचाया था तभी महाराज दशरथ ने आपको दो वर मांगने के लिए कहा था परन्तु आपने उस समय मना कर दिया फिर भी महाराज जी ने कहा जब तुम्हारी इच्छा हो मांग लेना
अभी समय आ गया है तुम भरत के लिए राज गद्दी ओर राम को 14 बरस का बनवास
केकयी कोप भवन में जाती है ओर राजा दशरथ को दासी भेज कर बुलवाती है
दशरथजी आते हैं केकयी द्वारा वर मांगने की बात याद दिलाती है राजा दशरथ ने कहा तुम पहले रानी की तरह हमारे कक्ष में आओ
केकयी द्वारा राजा के कक्ष में दो वर मागी प्रथम राम को 14 वर्ष का वनवास ओर भरत को राज गद्दी जिसे सुन कर दशरथ अचेत से हो जाते हैं उधर केकयी ने राम को बुलाया ओर महाराज दशरथ के वचनों को बताया जिसे श्री राम ने हसते हुए कहा माता हम तो भरत को हि अयोध्या का राजा बनाना चाहते थे चलो हमारी इच्छा पूरी हुए दसरा वर बताये माता १४ वर्ष का बनवास भी पिता श्री की इच्छा है तो पुर्ण करु गां हम अभी बनवास के जाने की तेयारी करते है
उधर प्रजा को श्री राम के वनवास ओर भरत को राज गद्दी के बारे में पता चलता है प्रजा में असंतोष व्याप्त हो जाता है श्री राम के साथ लक्ष्मण व भार्या सीता भी वन जाने लगतीं प्रजा को राम समझाते हैं फिर भी प्रजा मत जाओ मत जाओ गाते हुए श्री राम के पीछे पीछे वन जाने लगतीहै
उधर राजा दशरथ ने राम के वियोग मे केकयी को श्राप दिया कि यदि तुम्हारे वचनों से भरत भी सहमति है हमारे मरने पर मुझे उसका जल भी
स्विकार नहीं ओर हमने तुम्हारे साथ अगनि के साक्षी में जो सात फेरा लिया उसे में वापस लेता हु प्राण त्याग दिया

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