कौशाम्बी के सुधवर गांव में हुई ‘‘कला चौपाल’’

प्रयागराज (अनुराग दशम समाचार )। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विगत दो वर्षों से चल रही ‘कला चौपाल’-चलो गांव की ओर का आयोजन कौशाम्बी के सुधवर गांव में हुआ।
ढेंडिया पर्व पर आधारित इस कला चौपाल में स्थानीय कला के बारे में बात चीत हुई तथा आस-पास के ग्रामीण अंचलो से आये कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियांे से ग्रामीणों को अवगत कराया। ग्रामीण महिलाओं ने ढेडि़या के मूल गीतों को गाया।
बिट्टन दिवाकर, राजरानी, कलावती, रेखा, रीता देवी, सुग्गन देवी आदि महिलाओं ने ढेडि़या गीत की प्रस्तुति दी। वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति में मंुशी लाल सोनकर, श्याम बाबू आदि ने पंवारा व पचरा गीत गाकर लोगा को मंत्रमुग्ध किया।
धोबिया गीत गाने वाली स्थानीय मंडली ने अपने धोबिया गीत एवं निर्गुण भजन व विलुप्त होती पारम्परिक गायकी से जन समुदाय को अवगत कराया वहीं छोटे लाल, भोला, कल्लू और ननकू ने स्थानीय गीत की बारीकियों से भी लोगों को अवगत कराया।
चौपाल में गुमनामी का जीवन जी रहे कलाकार गुलाब भारतीय जिन्होंने लगभग १० वर्षों अपनी गायन विधा को छोड़ दिया था, उन्होनें चौपाल के बीच में खड़े बिरहा गायन की प्रस्तुति दी जो कि चौपाल के उद्देश्य को सार्थक किया जो कि गौरव का विषय था, जिन्हे केन्द्र से जोड़ने का पूरा आश्वासन केन्द्र परिवार की ओर से दिया गया। कला चौपाल का यह आयोजन कोरोना महामारी में लॉकडाउन समयावधि के बाद केन्द्र का पहला आयोजन था। आयोजन में केन्द्र की ओर से सुधवर ग्राम के वरिष्ठ नागरिक चन्द्र राम दिवाकर द्वारा प्रस्तुति तथा संवाद से जुड़े सभी नागरिकों को केन्द्र की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वर्धा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नरेन्द्र दिवाकर आदि उपस्थित रहे। केन्द्र के सहायक कार्यक्रम अधिशाषी मधुकांक मिश्रा द्वारा कला चौपाल के आयोजन पर प्रकाश डालते हुए अपनी संस्कृति, सांस्कृतिक धरोहर और सभ्यता के संरक्षण व संवर्द्धन पर बात की गयी और केन्द्र निदेशक इन्द्रजीत ग्रोवर की ओर से सुधवर के ग्रामीणों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर केन्द्र के कृष्ण मोहन द्विवेदी व रवि शंकर उपस्थित रहे, जिन्होंने चौपाल से जुड़े सभी नागरिकों का कलाकार बन्धुओं का केन्द्र की ओर से आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम का संचालन विवेक रंजन द्वारा किया गया।




