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खुद के मुनाफे को लेकर होता है पूरा कारोबार ,नही सुनी जा रही अन्नदाता की गुहार

सरकारी मंशा पर हावी दिख रहे धान माफिया,

(अनुराग शुक्ला / रमेश तिवारी )

कोरॉव,प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) किसानों की धान खरीद के लिए निजी एजेंसियों द्वारा खोले जाने वाले केंद्र केवल खुद की कमाई का जरिया ही दिख रहे हैं और किसानों की धान खरीदने की आड़ में बिचौलियों एवं दलालों से सांठगांठ करके धान खरीद का पूरा कारोबार किया जा रहा है। जिसके चलते क्षेत्र के किसानों की धान पूरी तरह से सरकारी क्रय केंद्रों पर तौल नहीं हो पाती है। क्षेत्र में अगर विपणन शाखा केंद्रों को छोड़ दिया जाए तो सहकारी समितियों सहित जितने भी अन्य निजी एजेंसियों के केंद्र खोले गए हैं सभी पर कागजी आंकड़े बाजी दिखाई जा रही है जबकि जमीनी हकीकत यह है कि किसी भी सेंटर पर धान की तौल नहीं दिख रही है ।सबसे हैरत की बात यह है कि केंद्र पर धान की तौल नहीं हो रही है लेकिन अगर इन एजेंसियों के ऑनलाइन खरीद के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो हजारों कुंतल धान की खरीद की जा चुकी है ।लोगों का आरोप है कि धान माफियाओं एवं बिचौलियों की मिलीभगत से इन केंद्रों पर धान खरीद का धंधा चलता है और इनको किसानों के हित से कोई लेना देना नहीं होता बल्कि इनका सारा कारोबार खुद के फायदे के लिए चलाया जाता है ।विश्वस्त विभागीय सूत्रों की मानें तो इन एजेंसियों के संचालन की जिम्मेदारी लेने वाले लोगों की पकड़ सत्ता के गलियारों और बड़े अफसरों तक होती है जिसके चलते तहसील स्तर के अधिकारी ना चाहते हुए भी इनके खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं कर पाते ।नाम न छापने की शर्त कुछ निजी एजेंसियों के कर्मचारियों ने बताया कि उनको पूरी छूट ऊपर के अफसरों से मिलती है जिसके यवज में मोटा कमीशन अफसरों को दिया जाता है । कुल मिलाकर एजेंसियों द्वारा संचालित क्रय केंद्रों पर पूरी तरह ।से फर्जीवाड़ा हावी है और किसानों की धान तौल नहीं हो पा रही है जिसके चलते दुनिया का पेट भरने वाला अन्नदाता खुद भुखमरी के कगार पर जा रहा है।

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